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सिमडेगा/डेस्क: सिमडेगा का आम लोकल से ग्लोबल हो चुका है. सिमडेगा के आम के खास बनने की कहानी आम जनता तक पहुंचाने और उन्हें आम उत्पादन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आज जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस आम उत्सव सह बागवानी मेला में जिले भर के किसान अपने तरह तरह के आमों के उत्पादन को लेकर पहुंचे और आमों को प्रदर्शनी में लगाया गया.
कार्यक्रम की शुरुआत डीसी सिमडेगा कंचन सिंह, डीडीसी सिमडेगा दीपांकर चौधरी, सीएस सिमडेगा डॉ सुंदर मोहन सामद, जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनी पैकरा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कार्यक्रम के दौरान सिमडेगा के आम उत्पादन से निर्यात तक की कहानी पर आधारित वीडियो प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के दौरान डीडीसी दीपांकर चौधरी सिमडेगा के आमों के देश विदेश तक निर्यात की कहानी सुनाई. बता दें कि इस बार सिमडेगा ने देश के साथ साथ लंदन, इंग्लैंड, इटली आदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी आम निर्यात किए हैं.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसी सिमडेगा कंचन सिंह ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि का आधार हैं. उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में वृक्षों को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है तथा एक वृक्ष लगाने को कई पीढ़ियों के कल्याण के बराबर माना गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें. बिरसा हरित ग्राम योजना इसकी एक सफल मिसाल बनकर सामने आई है. प्रशासन किसानों को पौधे, तकनीकी सहायता और संसाधन उपलब्ध करा सकता है, लेकिन वास्तविक सफलता किसानों की मेहनत, धैर्य और समर्पण से ही संभव होती है.
डीसी ने बताए कि जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में आम एवं मिश्रित बागवानी विकसित की गई है तथा लगभग 12 हजार से अधिक किसान इस पहल से जुड़े हुए हैं. किसानों की मेहनत और विभागीय समन्वय के कारण आज सिमडेगा का आम राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुका है. उन्होंने कहा कि आम का निर्यात केवल उत्पादन का विषय नहीं है बल्कि गुणवत्ता आधारित प्रक्रिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जाने वाले आमों को आकार, वजन, गुणवत्ता, पैकिंग और अन्य तकनीकी मानकों पर खरा उतरना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आम एक समान मूल्य पर नहीं बिक सकते, क्योंकि निर्यात योग्य फलों के लिए विशेष गुणवत्ता मानक निर्धारित होते हैं.
डीसी ने बताया कि प्रशासन अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य कर रहा है. आने वाले समय में जिले में आम आधारित प्रसंस्करण इकाइयों के विकास की योजना है, जहां जैम, फ्रूट क्रश, कैंडी, पल्प और अन्य उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे. इससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय उपलब्ध हो सकेगी.उन्होंने कहा कि सिमडेगा की मिट्टी और जलवायु यहां के आम को विशिष्ट पहचान देती है. केवल आम ही नहीं बल्कि जिले की इमली भी अपनी अलग गुणवत्ता और स्वाद के कारण पहचान बना रही है. प्रशासन भविष्य में कृषि आधारित प्रसंस्करण और विपणन को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करेगा.
कार्यक्रम में डीडीसी सिमडेगा दीपांकर चौधरी ने कहा कि सिमडेगा जिले ने कहा कि झारखंड से बड़े पैमाने पर विदेशों में देश विदेश तक आम निर्यात कर राज्य के लिए एक नई उपलब्धि स्थापित की है. उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रवेश करना केवल उत्पादन का प्रश्न नहीं बल्कि गुणवत्ता, प्रबंधन और बाज़ार की आवश्यकताओं को समझने की प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों से भेजे गए उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए, लेकिन सिमडेगा के आम को यूरोप और यूनाइटेड किंगडम सहित वैश्विक बाजारों में स्वीकार किया गया.
यह उपलब्धि किसानों, एफपीओ, जेएसएलपीएस और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने जानकारी दी कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत वर्ष 2019–24 तक लगभग 3000 एकड़ क्षेत्र में बागवानी की जा चुकी थी, जो अब बढ़कर 2024-26 में 10,692 एकड़ तक पहुंच गई है. शुरुआती चरण की बागवानी अब फल देना शुरू कर चुकी है. डीडीसी ने कहा कि योजना बनाते समय केवल पौधारोपण नहीं बल्कि बाजार से जोड़ने और उत्पाद के विपणन की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया.
जेएसएलपीएस और एफपीओ ने किसानों को संगठित कर उत्पादन, संग्रहण, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात श्रृंखला विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में लगभग 250 टन आम का उत्पादन हो रहा है, जिसमें लगभग 80 टन बाजार तक पहुंच रहा है तथा लगभग 25 टन अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता के अनुरूप निर्यात किया जा रहा है. भविष्य में उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 700 से 1000 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने किसानों से एफपीओ से जुड़ने, आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने तथा उत्पादन को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने की अपील की.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनी पैंकरा ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना ने सिमडेगा को नई पहचान दिलाई है और इससे किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से धरातल पर दिखाई देना चाहिए. उन्होंने कुछ क्षेत्रों में बागवानी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जहां पौधारोपण या रखरखाव में कमी हो, वहां समय पर प्रबंधन मजबूती से सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने किसानों से पौधों की सुरक्षा और योजनाओं के प्रभावी उपयोग की अपील की.
कार्यक्रम के दौरान जेएसएलपीएस के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए. महिला समूहों ने बताया कि उन्होंने उत्पादन, संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई.एफपीओ से जुड़ी महिला निदेशकों ने आम निर्यात की प्रक्रिया, कोलकाता तक कंसाइनमेंट भेजने तथा वहां से लंदन सहित अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के अनुभव साझा किए. उन्होंने एपीडा और विभिन्न संस्थाओं के साथ हुए समन्वय की जानकारी भी दी.
रामरेखा महिला कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने किसानों को एफपीओ मॉडल की उपयोगिता समझाते हुए कहा कि सामूहिक उत्पादन और संगठित विपणन किसानों को बेहतर मूल्य और स्थायी बाजार उपलब्ध करा सकता है. कार्यक्रम में आम बागवानी से संबंधित वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों, एफपीओ प्रतिनिधियों और किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
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