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रांची/डेस्क: झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर राजधानी रांची में राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया. राज्य गठन के बाद पहली बार नौ जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं पर केंद्रित इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है.
यह कार्यक्रम पूर्व मंत्री बंधु तिर्की की पहल पर दीक्षांत मंडप में आयोजित किया गया, जिसमें नागपुरी, हो, कुरमाली, खड़िया, संताली, कुड़ुख़ सहित राज्य की सभी नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार, शिक्षाविद, शोधकर्ता और भाषा विशेषज्ञ शामिल हुए.
कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य इन भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषाओं से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल करना है. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भाषाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और उनके विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा और परिचर्चा की गई. आयोजकों के अनुसार, इस मंथन के आधार पर एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में भाषा संरक्षण और नीतिगत पहल के लिए आधार बनाया जा सके.
वक्ताओं ने कहा कि झारखंड का गठन केवल जल, जंगल और जमीन की अवधारणा पर ही नहीं, बल्कि यहां की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं तथा सांस्कृतिक पहचान के आधार पर भी हुआ है. ऐसे में आधुनिक दौर में अपनी मूल भाषाओं से दूर होती नई पीढ़ी को फिर से उनसे जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है. यह कॉन्क्लेव उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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