सुशांत महापात्र को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष ने हर्ष व्यक्त करते हुए दिए बधाई

Pramod Kumar,News11 Bharat,

छऊ केवल स्थानीय कला नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

मधु सुदन/न्यूज11 भारत 

सरायकेला/डेस्क:विश्वविख्यात सरायकेला छऊ कला के मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कर-कमलों से प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त होने पर नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष एवं छऊ कला के संरक्षण-संवर्धन के लिए सक्रिय मनोज कुमार चौधरी ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं.

मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला छऊ केवल स्थानीय कला नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. नृत्य, संगीत, युद्ध-कौशल, अभिनय और अद्भुत मुखौटा शिल्प का अनूठा संगम इसे विश्व की विशिष्ट कलाओं में स्थान दिलाता है.

उन्होंने कहा कि सरायकेला की इस महान कला परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखने में अनेक गुरु और कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. समय-समय पर कलाकारों को पद्म सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलना इस कला की प्रतिष्ठा को और मजबूत करता है.

चौधरी ने कहा, “मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना उनकी वर्षों की साधना, मेहनत और समर्पण का सम्मान है. यह पूरे सरायकेला और छऊ परिवार के लिए गौरव का विषय है. उनके हाथों से निर्मित मुखौटे केवल कला-कृतियां नहीं, बल्कि सरायकेला छऊ की आत्मा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं.”

उन्होंने कहा कि इस सम्मान से छऊ कला से जुड़ी नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी. जरूरत है कि छऊ नृत्य, पारंपरिक मुखौटा शिल्प और इससे जुड़े गुरु-कलाकारों को संरक्षण, प्रशिक्षण तथा उचित मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक और समृद्ध रूप में पहुंच सके.

मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सुशांत महापात्र का सम्मान सरायकेला की माटी, यहां की कला-साधना और प्रत्येक छऊ कलाकार का सम्मान है. उनकी इस उपलब्धि से पूरा सरायकेला गौरवान्वित है.

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