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Pramod Kumar,News11 Bharat,

विधि के शासन एवं झारखंड एकेडमिक काउंसिल के वैधानिक निर्णयों का सम्मान आवश्यक : अबू सैयद अंसारी

न्यूज11  भारत

बुंडू/डेस्क: ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष अबू सैयद अंसारी ने कहा कि शिक्षा संस्थानों से जुड़े सभी विवादों का समाधान केवल संविधान, प्रचलित कानून तथा सक्षम न्यायालयों एवं वैधानिक प्राधिकारियों के निर्णयों के आधार पर ही होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) एक वैधानिक संस्था है, जो झारखंड एकेडमिक काउंसिल अधिनियम, नियमों एवं प्रचलित विधिक प्रावधानों के अनुरूप अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करती है. परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में आवश्यकतानुसार शासी निकाय (Governing Body) का गठन विधि एवं नियमों के अनुसार किया जाता है. जब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा किसी आदेश को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उसका सम्मान किया जाना चाहिए.

अबू सैयद अंसारी ने कहा कि कुछ लोग अपने निजी दृष्टिकोण अथवा व्यक्तिगत हितों के कारण झारखंड एकेडमिक काउंसिल के निर्णयों पर सार्वजनिक रूप से अनावश्यक प्रश्न उठाकर समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं. यदि किसी व्यक्ति या संस्था को परिषद के किसी निर्णय पर आपत्ति है, तो उसका उचित मंच न्यायालय अथवा संबंधित वैधानिक प्राधिकारी है, न कि मीडिया अथवा सार्वजनिक मंचों के माध्यम से भ्रामक प्रचार करना.

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को संविधान के अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अधिकार प्राप्त हैं, किंतु ये अधिकार भी कानून एवं संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अधीन हैं. किसी संस्था की पात्रता, उसके उद्देश्य, संचालन अथवा अल्पसंख्यक दर्जे से जुड़े विवादों का अंतिम निर्णय केवल राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) अथवा सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है. यदि किसी संस्था के संबंध में यह विवाद उत्पन्न होता है कि वह अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था के लिए निर्धारित कानूनी मानदंडों एवं शर्तों का पालन कर रही है या नहीं, तो उसका निर्णय केवल उपलब्ध अभिलेखों, साक्ष्यों एवं विधि के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए. ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा स्वयं को अंतिम निर्णयकर्ता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है तथा सभी पक्षों को न्यायिक एवं वैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि किसी भी वैधानिक संस्था अथवा उसके अधिकारियों के विरुद्ध अमर्यादित, अपमानजनक अथवा भ्रामक भाषा का प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों एवं विधि के शासन के विपरीत है. असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, किन्तु वह तथ्यपरक, संयमित एवं कानूनी मर्यादाओं के भीतर होनी चाहिए.

अबू सैयद अंसारी ने कहा कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा गठित शासी निकायों पर यदि किसी को कोई कानूनी आपत्ति है, तो उसका समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाना चाहिए. बिना किसी सक्षम न्यायिक निर्णय के परिषद के निर्णयों को अवैध बताना अथवा उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले वक्तव्य देना उचित नहीं है.

उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को व्यक्तिगत विवाद का माध्यम न बनाएं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और संस्थाओं के हित में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें तथा वैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखें.

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