झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार या संस्था से बड़ा है: रघुवर दास 

Ark Sahuliyar

लाखों मेहनती युवाओं के विश्वास और भविष्य पर सीधा आघात: रघुवर दास

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को लेकर लगातार सामने आ रहे आरोप अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं. यदि सोशल मीडिया पर वायरल OMR शीट तथा परीक्षा परिणाम से जुड़े दावे सत्य हैं, तो यह केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न नहीं, बल्कि लाखों मेहनती युवाओं के विश्वास और भविष्य पर सीधा आघात है.

उन्होंने कहा कि JPSC परीक्षा 2025 का असामान्य रूप से ऊंचा कटऑफ, OMR शीट को लेकर उठ रहे सवाल, परिणाम प्रक्रिया पर सामने आ रही चर्चाएँ तथा मुख्य परीक्षा को अत्यंत कम समय में आयोजित करने की जल्दबाजी इन सभी बिंदुओं पर आयोग और राज्य सरकार को तत्काल स्पष्ट एवं सार्वजनिक जवाब देना चाहिए. 7वीं JPSC परीक्षा के दौरान भी OMR से जुड़े विवाद सामने आए थे. इसलिए इस बार भी हर संदेह का तथ्यों के साथ समाधान करना आयोग की जिम्मेदारी है. केवल JPSC ही नहीं इस सरकार के समय जितनी भी परीक्षाएं हुई है, सभी में गड़बड़ियां सामने आई है.

रघुवर दास ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हमेशा झारखंड के युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. हमारे कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को सर्वोच्च महत्व दिया गया. एक लाख से ज्यादा सरकारी नियुक्तियाँ बिना किसी विवाद के संपन्न हुईं. झारखंड दारोगा भर्ती हमने रिकॉर्ड 9 महीने के भीतर प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा लेकर संपन्न कराई, जिसमें 300 से ज्यादा आदिवासियों के बच्चे सफल हुए. इसके साथ ही हमने शिक्षक नियुक्ति, वनरक्षी, पंचायत सचिव, राजस्व उपनिरीक्षक, उत्पाद उपनिरीक्षक, विभागीय लिपिक तथा अन्य अनेक नियुक्तियाँ पारदर्शी तरीके से कराई.

उन्होंने कहा कि मैं झारखंड सरकार एवं JPSC से मांग करता हूँ कि परीक्षा से जुड़े सभी आरोपों पर तत्काल सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाए तथा पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय एजेंसी से कराई जाए. बार-बार ऐसी गड़बड़ियां युवाओं के साथ मजाक बन गई हैं. माता-पिता उन्हें अपना पेट काटकर पढ़ाते हैं, उनका मन व्यथित हो जाता है. वहीं युवाओं की आयु भी बढ़ती जाती है, ऐसी घटनाएं  उनके भविष्य के साथ भद्दा मजाक है. युवाओं के सपनों और भविष्य की रक्षा करना सरकार और आयोग दोनों की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी है.

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