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रांची/डेस्क: राजधानी रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय पर हुआ पेट्रोल बम्ब हमला पूरी तरह से रची गयी सुनियोजित योजना का हिस्सा था. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस हमले की परतें एक के बाद एक उखड़ती जा रही हैं. अब जो सनसनीखेज खुलासा हुआ है, उसमें यह बात सामने आई है कि पैसे देने की बात पर आरोपियों को हमले का मोहरा बनाया गया था. पुलिस की गिरफ्त में आया रांची का टोटो चालक सायम सुजान इस साजिश के केन्द्र में था. जानकारी के अनुसार, थोड़े से पैसों की खातिर सायम सुजान इतना बड़ा कांड करने के लिए तैयार हो गया था. सायम सुजान ने खुद पुलिस के समक्ष यह कुबूल किया कि ऐसा करने का उद्देश्य बेहद खतरनाक था. दरअसल, इस कांड की असली मंशा रांची को सांप्रदायिक आग में झोंकने की थी और इसकी साजिश बहुत पहले से रची जा रही थी. और इसका केन्द्र बनाया गया था निवारणपुर का आरएसएस प्रान्तीय कार्यालय.
साजिश के पीछे कौन? नेटवर्क का असली सूत्रधार कौन?
अब यह सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी साजिश रची गयी थी तो उसके असली सूत्रधार कौन थे. क्योंकि संघ कार्यालय पर हमले करने वाले तो प्यादा से ज्यादा नहीं हैं. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, फुल बगान पथलकुदवा निवासी सायम सुजान ने पूरी कहानी बताई है. उसने कुबूल किया है कि बचपन का दोस्त अमन अंसारी लखनऊ के किसी 'बड़े नेटवर्क' से जुड़ा था. 16 जून को अमन अंसारी ने फोन कर उसे 50 हजार रुपया और बड़े इनाम का लालच दिया, टोटो चालक सायन सुजान के लिए यह बहुत बड़ा लालच था. इस लालच में आकर उसने संघ कार्यालय की रेकी करनी शुरू कर दी. इसमें सायम सुजान के साथ अमन अंसारी और सैफ अंसारी भी शामिल थे. पेट्रोल बम के सामान के साथ सायम सुजान कांटाटोली के ‘होटल रॉयल इन’ के कमरा नंबर 202 में मास्टरमाइंड राणा हुसैन उर्फ अन्वेश राजपूत से मिला. यही पर सभी ने मिलकर खौफनाक साजिश को अंजाम देने का प्लान तैयार किया. सुजान ने आका की मौजूदगी में वीडियो देखकर स्प्राइट और चिल्ली सॉस की बोतलों में पेट्रोल भरकर बम तैयार किया. फिर आधी रात को रैपिडो बाइक से निवारणपुर स्थित आरएसएस कार्यालय पहुंचे और दफ्तर पर पेट्रोल बम फेंककर फरार हो गए.
इस बड़ी वारदात के बाद जब पूरे झारखंड ही नहीं, पूरे देश में हंगामा मच गया तब पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस गिरफ्तारी के बाद ही पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ. अब जानकारी यह भी सामने आ रही है कि जिस पैसे की खातिर देशद्रोह पर आरोपी उतर आए थे, वह पैसा उन्हें मिला भी नहीं.