60 लाख के जेवरात चोरी का खुलासा: उड़ीसा के गुलगुलिया गैंग का सदस्य गिरफ्तार, हैदराबाद में मिली थी विशेष ट्रेनिंग

Ark Sahuliyar

इटखोरी की वारदात का पर्दाफाश, कई दिनों की रेकी के बाद दिया गया था चोरी को अंजाम

न्यूज़11 भारत 
चतरा/डेस्क:
चतरा जिले के इटखोरी बाजार में एक ज्वेलरी कारोबारी की बाइक की डिक्की से करीब 60 लाख रुपये मूल्य के आभूषण चोरी होने के मामले का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है. इस मामले में उड़ीसा के जाखापुर थाना क्षेत्र स्थित दशमनिया गांव के रहने वाले दीपक प्रधान को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी एक सक्रिय संगठित गिरोह से जुड़ा है, जो विभिन्न राज्यों में इस तरह की वारदातों को अंजाम देता रहा है. पूरे मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने प्रेस वार्ता के दौरान दी.

ग्राहक बनकर पहुंचा, सस्ते सोने का लालच देकर जुटाई कारोबारी की पूरी जानकारी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने घटना को अंजाम देने से पहले कई दिनों तक ज्वेलरी दुकान और कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रखी. उसने खुद को ग्राहक बताकर दुकान में प्रवेश किया और आधा किलो चोरी का सोना कम कीमत पर बेचने की बात कहकर कारोबारी का विश्वास जीतने की कोशिश की. बातचीत के दौरान उसने व्यवसायी की दिनचर्या, आने-जाने के समय और कीमती जेवरात ले जाने के तरीके की पूरी जानकारी हासिल कर ली. इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से बाइक की डिक्की से लाखों रुपये के आभूषण चोरी कर लिए.

पत्थलगड़ा और जोरी की घटनाओं से भी जुड़ सकते हैं तार
एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि उसने चतरा जिले के पत्थलगड़ा और जोरी थाना क्षेत्रों में भी ज्वेलरी कारोबारियों को निशाना बनाया था. पुलिस इन मामलों में भी उसकी भूमिका की जांच कर रही है.

उड़ीसा से संचालित होता था गिरोह, सरगना देता था मासिक भुगतान
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का संचालन उड़ीसा निवासी आकाश प्रधान करता है. गिरोह के सदस्यों को अपराध करने के बदले हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान किया जाता था. दशमनिया और आसपास के गांवों के कई युवकों को इस नेटवर्क से जोड़कर अलग-अलग राज्यों में चोरी और छिनतई की घटनाओं को अंजाम देने के लिए भेजा जाता था.

हैदराबाद में दी जाती थी डिक्की तोड़ने और फरार होने की विशेष ट्रेनिंग
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्यों को हैदराबाद में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बाइक और कार की डिक्की बिना नुकसान पहुंचाए खोलने, भीड़ में अपनी पहचान छिपाने, रेकी करने और वारदात के बाद तेजी से मौके से निकलने के तरीके सिखाए जाते थे. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय किया जाता था. पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके सरगना की तलाश में जुटी है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क ने झारखंड समेत अन्य राज्यों में अब तक कितनी बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है.

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