3 करोड़ रूपया लेकर वोट को बेचने वालों को हर जगह भ्रष्टाचार दिखता है: प्रतुल शाह देव

Ark Sahuliyar

झामुमो का यह पत्र लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक असुरक्षा और विधायकों पर अविश्वास का प्रमाण है

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झामुमो के सांसदों ने नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के लिए 3 करोड़ की रिश्वत ली थी. इसलिए उनको हर कदम पर भ्रष्टाचार ही दिखता है. प्रतुल ने कहा कि वह संसदीय इतिहास का सबसे काला अध्याय था जब 75-75 लाख रुपयों लेकर झामुमो सांसदों ने अपने वोट को बेच दिया था और पैसे को बैंक में जमा भी कर दिया था. अब झामुमो अपने ही विधायकों की निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. वैसे भी झारखंड मुक्ति मोर्चा का इतिहास रहा है कि उसने थैलीशाहों को झारखंड के रास्ते राज्यसभा भेजा है. जिस गठबंधन के नेता स्वयं दावा करते हैं कि उनके पास पूर्ण बहुमत है, वही अब राज्यसभा चुनाव से पहले भय, खरीद-फरोख्त और अस्थिरता की आशंका जता रहा है. यह साफ संकेत है कि गठबंधन के भीतर भारी अंतर्विरोध और अविश्वास व्याप्त है.

प्रतुल शाह देव ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखने वाली पार्टी है. राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है. यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है. सत्ता में बैठे लोग आज केंद्रीय एजेंसियों और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच यह है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और अंदरूनी कलह से घिरी हुई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा आज उन्हीं संस्थाओं से हस्तक्षेप करने का गुहार लगा रही है जिनको वह रोज पानी पी कर गाली देने से परहेज नहीं करती रही है.

प्रतुल शाह देव ने कहा कि यदि गठबंधन इतना ही मजबूत है तो उन्हें भाजपा के उम्मीदवार उतारने से डर क्यों लग रहा है? लोकतंत्र में चुनाव प्रतिस्पर्धा का विषय होता है, भय और बहानों का नहीं. झामुमो को पहले अपने घर को संभालना चाहिए, क्योंकि खतरा भाजपा से नहीं बल्कि उनके अपने असंतुष्ट विधायकों से है.

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