नक्सलवाद के गढ़ में पहली बार बेखौफ फहराया गया तिरंगा, नक्सलमुक्त हुआ पश्चिमी सिंहभूम

Dipali Kumari

सारंडा-कोल्हान जंगलों में बसे दुर्गम संगाजाटा गांव में सुबह 6 बजे ही दोहरा उत्सव शुरू हो गया.

रोहन निषाद/न्यूज़ 11 भारत 
चक्रधरपुर/डेस्क:
जब पूरा देश कल 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तो वहीं सारंडा-कोल्हान जंगलों में बसे दुर्गम संगाजाटा गांव में सुबह 6 बजे ही दोहरा उत्सव शुरू हो गया. यह अरहासा पंचायत का वह गांव है जो बरसात में चारों ओर की धाराओं के कारण अक्सर कट जाता है. इस बार आजादी के साथ ग्रामीणों ने दशकों पुराने नक्सलवाद से मुक्ति का भी जश्न मनाया. कभी यह पंचायत नक्सलियों का गढ़ रही. यहां से 90-100 लोग नक्सल गतिविधियों से जुड़े, जिनमें संगाजाटा के 15 नक्सली शामिल थे. इनमें ₹5 लाख के इनामी सगेन अंगरिया भी था, जिस पर 124 मामले दर्ज थे. दो दशकों में 40 से अधिक नागरिक नक्सली हिंसा में मारे गए.

15 अगस्त को पहली बार एसपी अमित रेणु के निर्देश पर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी, थाना प्रभारी विक्रांत मुंडा समेत पुलिस दल सुबह 5:30 बजे गांव पहुंचा और ग्रामीणों के साथ तिरंगा फहराया. चार दिन पहले 11 अगस्त को ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत अंतिम तीन नक्सलियों के सरेंडर के बाद जिले को नक्सलमुक्त घोषित किया गया था. डॉ. हाशमी ने स्वास्थ्य शिविर भी लगाया. मोबाइल टावर, सड़क और पुल निर्माण से अब विकास की राह खुली है. 

कभी बंदूक के साये में जीने वाले बच्चों ने अब शिक्षक, डॉक्टर और पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखा. संगाजाटा के लिए यह स्वतंत्रता दिवस भय से मुक्ति और नए भविष्य की शुरुआत हुई है. पुलिस प्रशासन कार्य और सराहना एवं सहयोग मिलने पर ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है और दुर्गम क्षेत्र में विकास का रास्ता खुला है.

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