कौन है 1 करोड़ इनामी मिसिर बेसरा? दिल्ली में नौकरी करती है बेटी, भाई है पारा शिक्षक; जानिए नक्सली की पूरी कहानी

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जानिए गिरफ्तार 1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के परिवार और उनके जीवन के बारे में.

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रांची/डेस्क:
 प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और 1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को कल रात गिरफ्तार कर लिया गया. यह गिरफ्तारी झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है. 1 करोड़ इनामी मिसिर बेसरा पर कुल 141 नक्सली मामले दर्ज हैं.  मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही झारखंड में अब नक्सलियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है. 

दिल्ली में नौकरी करती है बेटी

मिसिर बेसरा ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की है और वह हिंदी, संथाली तथा हो भाषा का जानकार है. उसके परिवार में पत्नी, एक 18 वर्षीय बेटा और एक बेटी हैं। 27 वर्षीय बेटी दिल्ली में नौकरी करती है, जबकि उसका भाई देवी लाल बेसरा पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत है. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य बताई जाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार के पास करीब तीन एकड़ कृषि योग्य जमीन और एक खपरैल मकान है.

छात्र जीवन से ही नक्सली संगठन से जुड़ा था नक्सली 

जांच एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा छात्र जीवन के दौरान ही वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर नक्सली संगठन से जुड़ गया था. बताया जाता है कि वर्ष 1986 में उसे संगठन की प्राथमिक सदस्यता मिली और इसके बाद उसने अलग-अलग इलाकों में संगठन के प्रचार-प्रसार, कैडर तैयार करने और संगठन को मजबूत करने का काम किया. वर्ष 1997 में उसने दक्षिणी छोटानागपुर कमेटी के गठन में भूमिका निभाई, जबकि वर्ष 2000 में झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में भी सक्रिय रहा. इसी दौरान बुंडू क्षेत्र में पहला सशस्त्र नक्सली दस्ता गठित करने में भी उसकी भूमिका बताई जाती है. बाद में वर्ष 2003 में उसे संगठन की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाया गया और 2004 में विभिन्न नक्सली संगठनों के विलय के बाद उसे सैन्य कमान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई. 

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