मानसून के दौरान कपड़ों की देखभाल

बारिश में अलमारी के कपड़ों पर क्यों जम जाती है फफूंद ? इन आसान उपायों से रखें कपड़ों को सुरक्षित

मानसून की बारिश के कारण कपड़ों में नमी और फफूंद बढ़ जाती है। जानिए कपड़ों और अलमारी को फफूंद से बचाने के लिए उपाय।

By : सोनिया रायकवार
बारिश में अलमारी के कपड़ों पर क्यों जम जाती है फफूंद ? इन आसान उपायों से रखें कपड़ों को सुरक्षित

मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं घर में बढ़ती नमी कई तरह की परेशानियां भी लेकर आती है। इसका असर खासतौर पर कपड़ों, दीवारों और फर्नीचर पर दिखाई देता है। बारिश के मौसम में अक्सर लंबे समय से अलमारी में रखे कपड़ों पर छोटे-छोटे काले, हरे या भूरे धब्बे नजर आने लगते हैं। कई बार कपड़ों से सीलन या बासी जैसी गंध भी आने लगती है। ये संकेत कपड़ों पर फफूंद यानी मोल्ड के पनपने के हो सकते हैं।आइए जानते हैं इससे बचने के उपाय।

क्यों लगती है फफूंद?

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर बढ़ जाता है। अगर अलमारी के अंदर हवा का आवागमन कम हो, तो वहां नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में हल्के गीले या पूरी तरह न सूखे कपड़े अलमारी में रखने से फफूंद के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। लंबे समय तक इस्तेमाल न किए जाने वाले कपड़ों में भी नमी और धूल जमा होने के कारण फफूंद पनप सकती है। कपड़ों पर दिखाई देने वाले छोटे धब्बे शुरुआत में मामूली लग सकते हैं, लेकिन समय रहते सफाई न की जाए तो ये फैल सकते हैं। फफूंद कपड़े के रेशों को नुकसान पहुंचाने के साथ उसकी गंध और रंग को भी प्रभावित कर सकती है।

सिर्फ धूप में रखना काफी नहीं

फफूंद लगे कपड़ों को केवल धूप में रखने से समस्या पूरी तरह खत्म होना जरूरी नहीं है। सबसे पहले कपड़े को बाकी कपड़ों से अलग करें, ताकि फफूंद दूसरे कपड़ों तक न पहुंचे। कपड़े के फैब्रिक के अनुसार उसे अच्छी तरह धोना जरूरी है। धोने के बाद कपड़े को पूरी तरह सुखाएं और तब ही दोबारा अलमारी में रखें। सफाई के दौरान बहुत ज्यादा फफूंद लगे कपड़ों को झाड़ने से बचें, क्योंकि इससे उसके कण आसपास फैल सकते हैं।

अलमारी को भी करें साफ

कपड़ों की सफाई के साथ अलमारी की सफाई करना भी जरूरी है। अलमारी खाली करके उसके अंदर की सतह को साफ करें और पूरी तरह सूखने दें। मानसून में समय-समय पर अलमारी के दरवाजे खोलकर हवा का आवागमन होने दें। कपड़ों को बहुत ठूंसकर रखने के बजाय उनके बीच थोड़ी जगह छोड़ना भी फायदेमंद हो सकता है।

नमी कम रखना है सबसे जरूरी

अलमारी में नमी सोखने वाले उत्पाद या सिलिका जेल पैकेट रखे जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार कमरे में डिह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, इन्हें बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बारिश के मौसम में कपड़े पूरी तरह सूखने के बाद ही अलमारी में रखें।

अगर कपड़ों पर बार-बार फफूंद दिखाई दे रही है, तो समस्या केवल कपड़ों तक सीमित नहीं हो सकती। दीवार, अलमारी की पिछली सतह या कमरे में लगातार बनी नमी की जांच करना जरूरी है। समय रहते नमी के स्रोत को नियंत्रित करने और नियमित सफाई की आदत अपनाने से मानसून में कपड़ों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।


 

संबंधित सामग्री

बारिश से हाहाकार: काशी डूबी, बिहार में बाढ़; MP के 21 जिलों में अलर्ट

बारिश से हाहाकार: काशी डूबी, बिहार में बाढ़; MP के 21 जिलों में अलर्ट

उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में बारिश और बाढ़ की गंभीर स्थिति। वाराणसी के 84 घाट डूबे, बिहार में 50 हजार लोग बाढ़ में फंसे।

जनता की सुविधा से कोई समझौता नहीं! CM धामी ने सड़कों की बदहाली पर ली बैठक, अक्टूबर से खुद करेंगे निरीक्षण

जनता की सुविधा से कोई समझौता नहीं! CM धामी ने सड़कों की बदहाली पर ली बैठक, अक्टूबर से खुद करेंगे निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए, जिसमें मानसून के बाद तत्काल काम शुरू करने का आदेश शामिल है।

CM सुक्खू का BJP पर पलटवार, ‘व्हाइट पेपर’ से खुलेगा पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार का राज

CM सुक्खू का BJP पर पलटवार, ‘व्हाइट पेपर’ से खुलेगा पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार का राज

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक उठापटक जारी है। सीएम सुक्खू ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कई मुद्दों पर चर्चा की और व्हाइट पेपर कमेटी की जांच का उल्लेख किया।

शिवभक्ति में डूबा सीहोर, बारिश में भी नहीं रुके कांवड़ियों के कदम

शिवभक्ति में डूबा सीहोर, बारिश में भी नहीं रुके कांवड़ियों के कदम

सीहोर में प्रदोष के अवसर पर कांवड़ यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। बारिश के बीच भी भक्ति की भावना अडिग रही, जयकारे और भजनों से गूंजा पूरा शहर।

सिर्फ आस्था नहीं, विज्ञान भी देता है सावन में मांस-मछली से परहेज की सलाह, समझिए असल वजह

सिर्फ आस्था नहीं, विज्ञान भी देता है सावन में मांस-मछली से परहेज की सलाह, समझिए असल वजह

सावन के महीने में शाकाहार के पीछे विज्ञान और आयुर्वेद दोनों का हाथ है, जिसमें पाचन तंत्र की धीमी गति और बीमारियों से बचाव के लिए सात्विक भोजन की सलाह दी जाती है।

Advertisement

Uk Add पहली बार क्षेत्रीय भाषा की फिल्मो को 50% 04 on 26 Aug 2026