बंगाल चुनाव में ‘बड़ा खेला’ के संकेत? झारखण्ड सीएम सोरेन TMC के लिए करेंगे प्रचार, कांग्रेस को झटका संभव
Jharkhand news: पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर ‘बड़ा खेला’ होने के संकेत मिल रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर शुक्रवार को चर्चाएं तेज हुई हैं कि वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो, असम में प्रचार के बाद अब उनकी नजर पश्चिम बंगाल पर है, जहां वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के पक्ष में रैलियां कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
[caption id="attachment_142201" align="alignnone" width="2048"]कांग्रेस से दूरी का साफ संकेत?
राजनीतिक गलियारों में इस खबर को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बंगाल में TMC और कांग्रेस के बीच कोई गठबंधन नहीं है। ऐसे में अगर सीएम सोरेन TMC के लिए प्रचार करते हैं, तो इसे कांग्रेस के खिलाफ एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाएगा। बता दें कि हाल ही में असम में भी हेमंत सोरेन TMC के समर्थन में प्रचार करते नजर आए थे, जिससे उनके रुख के संकेत पहले ही मिल चुके हैं।
हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन की एंट्री से बदलेगी रणनीति
इस बार एक और दिलचस्प पहलू यह भी है कि सीएम सोरेन के साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी चुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकती हैं। दोनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और TMC के बीच बढ़ते तालमेल का संकेत हो सकता है, जो भविष्य में बड़े राजनीतिक गठजोड़ का रूप ले सकता है।
[caption id="attachment_145934" align="alignnone" width="1200"]अभी जारी है शीर्ष स्तर पर मंथन
सूत्रों के अनुसार, JMM और TMC के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बातचीत हो रही है। इसी के आधार पर चुनाव प्रचार का पूरा कार्यक्रम और शेड्यूल तय किया जाएगा। फिलहाल, पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है, लेकिन अंदरखाने तैयारियां तेज बताई जा रही हैं।
पूर्वी भारत की राजनीति पर पड़ेगा असर
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर सीएम हेमंत सोरेन बंगाल में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो इसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। यह कदम पूर्वी भारत में क्षेत्रीय दलों के बीच नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। ऐसे समय में जब विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दल अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं, यह रणनीति विपक्षी राजनीति की दिशा भी बदल सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि हेमंत और कल्पना सोरेन कब बंगाल में प्रचार की शुरुआत करते हैं और इसका चुनावी नतीजों पर क्या प्रभाव पड़ता है।