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अमेरिका–ईरान युद्ध 2026 : युद्ध, तेल की कीमतें और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज – भारत पर क्या असर?”

“अमेरिका–ईरान युद्ध 2026 : युद्ध, तेल की कीमतें और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज – भारत पर क्या असर?”

US Iran war impact on India: अमेरिका–ईरान युद्ध 2026, फरवरी 2026 में शुरू होने के बाद अब उसके पाँचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और बावजूद इसके कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि युद्ध जल्द ही समाप्त हो जाएगा, दोनों तरफ से लगातार एयर और मिसाइल हमलों के साथ स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है।  ईरान लगातार मिसाइलें और ड्रोन इजरायल, अरब देशों और अमेरिकी ठिकानों पर दाग रहा है, जबकि अमेरिका और इजरायल ईरान के भीतर सैकड़ों मिसाइल‑साइटों, एयर डिफेंस सिस्टम और नेतृत्व भवनों पर निरंतर हमले कर रहे हैं।

US Iran war impact on India: दोनों तरफ यह दावा कर रहे हैं कि वे युद्ध के

“अंतिम चरण” में प्रवेश कर चुके हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है कि तीसरे सप्ताह के बाद से दोनों पक्षों के बीच गहराई से संघर्ष खत्म होगा या कम होगा।

युद्ध की शुरुआत: “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी”

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नामक संयुक्त एयर और मिसाइल कैंपेन शुरू किया, जिसके तहत केवल 12 घंटों के भीतर लगभग 900 सटीक हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य ठिकाने और अद्वितीय नेतृत्व भवनों पर बड़े पैमाने पर प्रहार किए गए और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य ईरान के धार्मिक और सैन्य नेतृत्व को विस्तारित रूप से बिखेरना था। इस जवाब में ईरान ने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन अमेरिकी और अमेरिकी‑संबंधित ठिकानों, तेल‑सुविधाओं और जहाज़ों पर दागे, जिसमें हॉर्मुज़ जलडमरी और अरब सागर के प्रमुख तेल‑मार्ग शामिल हैं।

ताज़ा मिलिट्री अपडेट: दोनों तरफ जवाबी प्रहार

अप्रैल 2026 की शुरुआत तक, ईरान ने एक ही दिन में इज़राइल पर कई लहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जो इज़राइली एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा अधिकांशतः बाधित (intercepted) कर दिए गए। यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देशों ने भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को अपने क्षेत्र के ऊपर अवरोधित करने की रिपोर्ट दी है, जिससे प्रमुख तेल लोडिंग बंदरों की सुरक्षा को और मज़बूत किया गया है। इसके जवाब में, अमेरिका और इज़राइल ईरान‑समर्थक मिलिशिया (जैसे हेज़बुल्लाह और अन्य गट) पर निरंतर बमबारी कर रहें हैं, जिससे लेबनान और सीरिया में उनकी क्षमता कमज़ोर हो रही है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध की शुरुआत से अब तक 13,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया गया है, जिनमें ईरान की अधिकांश मिसाइल‑साइटें और एयर डिफेंस नेटवर्क शामिल हैं। Readd More:- Centre grants ‘Deemed to be University’ tag to NCERT, institution set to roll out degree programmes

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ और तेल की कीमतें

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ इस युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जगह है, जहाँ से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल‑व्यापार गुज़रता है। ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद या गहन नियंत्रण में रखा है, जिससे केवल चुनिंदा देशों के जहाज़, जो अमेरिका और इज़राइल से कम संबंधित हैं, इसे पार कर पाते हैं। इस व्यवधान ने वैश्विक तेल की कीमतों को लगातार बढ़ाया है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड 108–110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है और अमेरिकी वास्तविक तेल‑सूचकांक भी 110 डॉलर के आसपास टिका हुआ है।  इस वृद्धि से स्टॉक‑बाज़ार में भारी गिरावट और वित्तीय अस्थिरता आई है, क्योंकि निवेशक एक लंबे युद्ध की संभावना देख रहे हैं।

ट्रंप की राजनीति और ईरान की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने बार‑बार कहा है कि युद्ध “कुछ हफ्तों में समाप्त” हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरी बंद रखी या लगातार हमले जारी रखे, तो वे ईरान की बिजली‑ग्रिड, तेल‑सुविधाओं और समुद्री‑जल विवेकन इकाइयों की पूरी तरह से विनाशकारी रणनीति पर जा सकते हैं।  साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता तेल‑कीमतें, जो अमेरिका के घरेलू भीतर दोहरे अंकों में उठ रही हैं, “स्वीकार्य” हैं और अमेरिका के पास इस संकट को सहने के लिए ऊर्जा‑संसाधन उपलब्ध हैं। ईरान के नेतृत्व ने इन दावों को खारिज कर दिया है और यह कहा है कि वे अमेरिकी युद्ध‑नीति से बिल्कुल विश्वास नहीं करते। ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि तब तक युद्ध जारी रहेगा, जब तक अमेरिका और इज़राइल अपनी सैन्य दबाव‑नीति समाप्त नहीं करते।

क्षेत्रीय प्रभाव और मानव‑लागत

यह युद्ध अब केवल ईरान–अमेरिका या ईरान–इज़राइल के बीच का नहीं रहा। लेबनान और सीरिया में ईरान‑समर्थित हेज़बुल्लाह ने दक्षिणी इज़राइल पर लगातार रॉकेट और मिसाइल हमले किए हैं, जबकि इज़राइल ने उनके लक्ष्यों पर जवाबी हमले किए।  लेबनान की स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि युद्ध के दो हफ्तों में 1,300 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं और कई शहर नागरिकों के उच्च स्तर पर विस्थापन के बारे विचार भी कर रहे हैं।

भारत पर युद्ध का असर

इस अमेरिका–ईरान युद्ध 2026 का भारत पर बड़ा असर तेल की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। भारत अपनी तेल ज़रूरत का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के बंद या संकुचित होने से तेल की आपूर्ति में देरी और महँगाई बढ़ रही है, जिससे पेट्रोल‑डीज़ल की कीमतें ऊपर चली जा रही हैं और राजकोष और घरेलू बजट दोनों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। इस युद्ध से भारतीय उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत भी बढ़ी है, क्योंकि जहाज़ों को लंबे रास्ते और अतिरिक्त बीमा की जरूरत पड़ रही है, वहीं भारत में रहने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों को विदेशी रोज़गार और व्यापार के जोखिम के चलते भी नुकसान हो सकता है; इस तरह यह युद्ध सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था, उपभोक्ता बिल और राजकोषीय घाटे पर गहरा दबाव डाल रहा है। Read Also: US–Iran War Reaches Critical Stage