फालता सीट पर बीजेपी की प्रचंड जीत ममता को नहीं पची! जो पार्टी चुनाव लड़ी ही नहीं वह ‘नतीजे भुगतने’ की दे रही धमकी!

Pramod Kumar,News11 Bharat,

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: किसी भी चुनाव में हार-जीत के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो आम है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद एकलौती फालता सीट पर पुनर्मतदान के नतीजे भी बीजेपी के पक्ष में आए तो पूर्व की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बिफर पड़ी है. बीजेपी ही नहीं, चुनाव आयोग पर भी अनर्गल आरोपों की बौछार कर दी है. आरोप की बात को अलग है, सबसे हैरत की बात यह है कि जो पार्टी चुनाव लड़ी ही नहीं, वह किसी पर क्यों आरोप लगा रही है? बता दें कि पुनर्मतदान से पहले ही टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद को चुनाव से अलग कर दिया था.  हालांकि जहांगीर खान का चुनाव से खुद को अलग करना निर्वाचन आयोग के दृष्टि से चुनाव से अलग होना नहीं है. इसकी पूरी प्रक्रिया है और उस प्रक्रिया में जहांगीर खान का निर्णय नहीं आता है, लिहाजा ईवीएम में उनका नाम और टीएमसी का निशान भी मौजूद था और उन्हें वोट भी पड़े. 

खैर, टीएमसी की तिलमिलाहट का कारण यह था कि डायमंड हार्बर की यह सीट टीएमसी की परंपरागत सीट थी और जो बड़ी जीत उसे इस सीट पर मिलती थी, उससे भी बड़ी जीत  बीजेपी उम्मीदवार को मिली है. बीजेपी की इसी रिकॉर्ड तोड़ जीत के कारण ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. बीजेपी उम्मीदवार ने 1,09,021 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की है. इतना ही नहीं,  पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में बीजेपी की यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है. और यही जीत ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी पचा नहीं पा रही है. इस करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार, बीजेपी और चुनाव आयोग पर चौतरफा हमला बोला है. ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है, ईवीएम (EVM) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का भी गंभीर आरोप लगाने के साथ वोट लूटने का सीधा आरोप लगाया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के लोगों को मतगणना केंद्र से धक्का देकर बाहर किया है.

ममता बनर्जी के ये आरोप तो चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं. लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु अधिकारी सरकार पर वही आरोप लगाए हैं जो पिछले 15 वर्षों से उनकी ही सरकार पर लगते रहे हैं. ममता बनर्जी ने पुलिस की निष्पक्षता और उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.  उनका कहना है कि पुलिस शिकारी की तरह व्यवहार कर रही है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों में खुलेआम तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया है. उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं, उनकी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि फालता में जो कुछ हुआ वह पूरी तरह से राज्य प्रायोजित आतंकवाद है. उन्होंने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा कि अब हम उसके दिल्ली की सत्ता से हटने का इन्तजार कर रहे हैं. उसके बाद उसे अपने सभी कृत्यों और तानाशाही का परिणाम भुगतना ही होगा.

ममता बनर्जी ने ही नहीं, डायमंड हार्बर सीट से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने वोटों की गिनती में गड़बड़ी का दावा किया है. दूसरी ओर टीएमसी के इन सभी आरोपों पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में करीब 15 साल के लंबे समय के बाद जनता को बिना किसी डर के आजादी से वोट डालना है, इसीलिए टीएमसी इसे पचा नहीं पा रही है. यह पार्टी अब एक माफिया कंपनी बन चुकी है, जिसने सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके जनता के पैसों की जमकर लूट मचाई थी.

बता दें कि फालता सीट पर ईवीएम पर इत्र छिड़कने, चुनाव चिह्न को ढंकने और बूथ कैप्चरिंग जैसी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने के बाद चुनाव आयोग ने यहां दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया था. दोबारा हुए इस मतदान में भी जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 86 फीसदी की रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई.

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