परिसीमन और एक देश एक चुनाव बिल फिर से लाने की तैयारी में मोदी सरकार, ताजा राजनीतिक हालात में तलाश रही नए अवसर

Pramod Kumar,News11 Bharat,

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा चुनावों से पूर्व परिसीमन विधेयक और 'एक राष्ट्र एक चुनाव' प्रस्ताव को एक बार फिर से संसद में लाने की तैयारी कर रही है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार और पार्टी में हो रही लगातार टूट को बीजेपी फायदे की नजर से देख रही है. बता दें कि ग्रीष्मकालीन संसद सत्र में भी केन्द्र सरकार ये बिल सदन में लेकर आई थी, लेकिन एनडीए का अपेक्षित संख्या बल नहीं होने और विपक्ष के एकजुट हो जाने के कारण बिल सदन में गिर गया था.  लेकिन तब और अब के राजनीतिक हालात में थोड़ा बदलाव आया है, जिसका फायदा केन्द्र की मोदी सरकार लेना चाह रही है.

बता दें कि अप्रैल में सदन में लाया गया महिला आरक्षण क़ानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया था. क्योंकि संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े थे. जबकि संशोधन बिल के लिए दो तिहाई मतों की जरूरत होती है, चूंकि यह स्थिति राज्यसभा में भी है, इसलिए केन्द्र सरकार ने राज्यसभा में वहस और बिल पेश करने का इरादा छोड़ दिया था.

मगर दो महीने के अन्तर देश के राजनीतिक हालात बदले हैं. इनमें पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव ने राजनीतिक परिस्थितियों को बदल कर रख दिया है. इन हालात में एनडीए सरकार अपने लिए अवसर तलाशने का प्रयास कर रही है.क्योंकि प्रचंड हार के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी का परिस्थितियां पर वश नहीं चल रहा है. पार्टी में टूट की लगातार खबरें आ रही हैं. वहीं तमिलनाडु में भी हार और कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद डीएमके के अन्दर भी अपने लिए अवसर तलाश रही है. इसलिए अब नए राजनीतिक फॉर्मूले ते तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति पर बीजेपी काम कर रही है.

सूत्र बता रहे हैं कि आवश्यक समर्थन जुटाने के लिए प्रयास सरकार डीएमके से भी संपर्क करने की कोशिशें कर रही है. तृणमूल कांग्रेस के भीतर के घटनाक्रम को भी बीजेपी अपने पक्ष में मान रही है. अगर बड़ी संख्या में टीएमसी सांसद पार्टी से अलग हो जाते हैं, तो एक नया समीकरण तो निश्चित रूप से बन सकता है. तब शायद आवश्यक समर्थन जुटाना आसान हो जाएगा. बता दें कि दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 वोटों की जरूरत है. यानी संशोधन बिल की पिछली वोटिंग के लिहाज से 64 वोटों की अभी और दरकार है. बता दें कि इस समय लोकसभा में टीएमसी के 29 और डीएमके के 22 सांसद हैं. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि ये सभी सांसद एनडीए को समर्थन कर ही देंगे. बीजेपी एक सम्भावना पंजाब में आप के सांसदों में तलाश सकती है, क्योंकि बीजेपी इस समय यह उम्मीद कर रही होगी कि जिस प्रकार राज्यसभा के नाराज सांसदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. उसी प्रकार उसे लोकसभा में आप सांसदों के समर्थन की उम्मीद होगी.

जहां तक राज्यसभा में दो तिहाई समर्थन की बात है तो एनडीए के पास इस समय कुल 148 सांसदों का समर्थन है. 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद यह आंकड़ा 150 के पार पहुंचने की उम्मीद है. 245 सांसदों वाली राज्यसभा में दो तिहाई के लिए 164 वोटों की जरूरत है. यानी अपने राज्यसभा चुनाव के बाद आवश्यक वोटों की संख्या थोड़ी जरूर घट जाएगी. इसे एनडीए किस प्रकार मैनेज करता है, यह देखने वाली बात होगी.

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