न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भयंकर हार के बाद भले ही लालू-राबड़ी परिवार इस बात पर अड़ा था कि वह पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित अपने सरकारी आवास को खाली नहीं करेगा, लेकिन सच देखा जाये तो राबड़ी-लालू परिवार को यह आवास तो कब का खाली कर देना चाहिए था. आखिर लालू परिवार इस अनलकी घर में किसलिए रहना चाहता था? एक नहीं, कई मायनों में यह घर लालू-राबड़ी कुनबे के लिए अनलकी रहा.
यह वही आवास है जिसमें लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव की बहू ऐश्वर्या का गृहप्रवेश हुआ था. लेकिन सबसे बड़ा अपशगुन तो तब हो गया जब ऐश्वर्या को अपमानित होकर इस घर से रोते हुए विदा होना पड़ा था. तेज प्रताप के लिए भी तो यह घर लकी साबित कहां हुआ, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही उनकी भी अपमानित होकर विदाई हो गयी थी. बिहार विधानसभा चुनाव के बाद तो लालू परिवार में गृहत्याग का तांता लग गया. लालू को अपनी किडनी देकर उनकी जीवन रक्षा करने वाली रागिनी भी तो अपमानित होकर घर से निकली थी. उनके घर से निकलने के बाद यह भी पता चला था कि लालू के छोटे लाल तेजस्वी यादव ने उन पर चप्पल फेंका था. कारण चाहे जो भी हो, अपमान तो घर की लक्ष्मी का ही हुआ था. इसके बाद लालू की दूसरी बेटियों ने भी इस घर को छोड़ना बेहतर समझा था. यहां तक की मीसा भारती भी स्वास्थ्य कारणों से ही सही, इस घर में नहीं हैं.
आज न के दोनों घर, राजनीतिक घर राजद और 10 सर्कुलर रोड का आवास, में अशांति और मनहूसियत छायी हुई है, यह मनहूसियत विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद तो छायी है, लेकिन मनहूसियत और इस आवास का बड़ा लम्बा नाता रहा है. चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की जेल यात्रा भी तो इसी आवास से शुरू हुई थी. इसके अलावा उनके ऊपर जितने भी आरोप लगे हों, चाहे वे जमीन के बदले जॉब का मामला हो, या फिर चारा घोटाला का, लालू प्रसाद ही नहीं, उनके पूरे परिवार ने इसी घर में रहते हुए झेला है.
लालू यादव के साले साधु यादव से भी अनबन इसी बंगले से हुई थी. वैसे यह बता दें कि साधु यादव लालू-राबड़ी परिवार से पहले करीब 9-10 साल इसी बंगले में रह चुके थे. साधु यादव का इसी बंगले में रहते हुए ही राजनीतिक करियर धूल में मिला है और अब लालू यादव की आंखों के सामने, अपने ही हाथों से खड़ी गयी उनकी पार्टी दुर्दशा झेलने को विवश है. इसी बंगले में रहते साधु यादव ने राबड़ी देवी को सत्ता से बाहर कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया था. मगर अब तो साधु यादव भी अर्से से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए भटक रहे हैं.
कुल मिला कर नतीजा यह है कि बहू, बेटे, बेटियों को एक-एक कर घर से विदा होते देखने के बाद लालू-राबड़ी का बचा कुनबा भी न चाहते हुए भी सरकारी आदेश के बाद यह आवास छोड़ने को विवश है, और उसने शिफ्टिंग शुरू भी कर दी है.
यह भी पढ़ें: असेका की ओर नरवा पहाड़ यूसिल कॉलोनी में तीन दिवसीय शीतकालीन परीक्षा का हुआ समापन