झारखंड में राज्यसभा सीटों पर ‘दोस्ती में दरार’? CM सोरेन और कांग्रेस के बीच बढ़ी खींचतान
झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच बढ़ती यह तनातनी आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।
राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी
मई 2026 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इन सीटों पर एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाला गठबंधन, झामुमो, कांग्रेस और आरजेडी है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मैदान में है।
हालांकि, मुकाबले से पहले ही गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर विवाद सामने आने लगा है, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
कांग्रेस ने एक सीट पर जताया दावा
कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि दो सीटों में से एक सीट पर उसका अधिकार बनता है। झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत करेगी।
उन्होंने तर्क दिया कि पिछले तीन राज्यसभा चुनावों में गठबंधन की स्थिति कमजोर होने के कारण सीट झामुमो के हिस्से में जाती रही, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हैं और गठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में है।
झामुमो दोनों सीटों पर उतार सकता है उम्मीदवार
वहीं, झामुमो दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के संकेत दे रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह कांग्रेस के साथ उसके रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति गठबंधन के भीतर दरार पैदा कर सकती है। इन दो सीटों में से एक झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण खाली हो रही है। इन दोनों सीटों के लिए जून में चुनाव प्रस्तावित है।
संख्याबल में मजबूत है सत्तारूढ़ गठबंधन
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इसमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और वाम दलों के 2 विधायक शामिल हैं। इस मजबूत आंकड़े के आधार पर गठबंधन दोनों सीटों पर जीत का दावा कर सकता है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर असहमति इस बढ़त को चुनौती दे सकती है।
क्या राहुल-सोरेन रिश्तों पर पड़ेगा असर?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि विवाद गहराता है, तो इसका असर कांग्रेस नेतृत्व और हेमंत सोरेन के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं।