उत्तर प्रदेश

गोकुल में मची छड़ीमार होली की रंगभरी धूम; पुलिसकर्मियों, विदेशियों पर भी गोपियों ने बरसाईं छड़ियाँ

UP Holi news: होली के शुरू होने के कुछ दीं पहले से ही ब्रज में होली का उत्सव अपने चरम पर है. इसी कड़ी में रविवार को गोकुल में सदियों पुरानी परंपरा ‘छड़ीमार होली’ पूरे उल्लास के साथ मनाई गई, जिसमें गोपियों ने जम कर हर साल की तरह भाग लिया. दुल्हन की तरह सजी-धजी गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के बाल स्वरूप को रंग और अबीर अर्पित किया. और इसके बाद गोटेदार कपड़ों से लिपटी छड़ियों से पारंपरिक अंदाज में प्रहार किए,जो इस अनूठी होली की पहचान है.

[caption id="attachment_137926" align="alignnone" width="1005"] UP Holi news[/caption]

UP Holi news: पुलिसकर्मी, विदेशी पर्यटक भी नहीं बख्शे गए

छड़ीमार होली की मस्ती कुछ यूँ बरसी कि बड़ी संख्या में पहुंचे विदेशी सैलानी भी इससे अछूते नहीं रहे. गोपियों ने उन पर भी दनादन छड़ियां बरसाईं. इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी छड़ीमार होली का हिस्सा रहे. भीड़ में मौजूद लोग हंसी-ठिठोली के बीच ‘और मारो, और मारो’ के नारे लगाते नजर आए.

इस अवसर पर बलदेव विधानसभा से भाजपा विधायक पूरन प्रकाश ने राधा-कृष्ण का रूप धरे कलाकारों के साथ मंच पर नृत्य कर उत्सव में चार चांद लगा दिए.

श्रीकृष्ण का डोला निकला नन्दभवन से

रविवार दोपहर 12:30 बजे होली उत्सव की शुरुआत हुई, और नंदभवन से भगवान श्रीकृष्ण के डोले का प्रस्थान करवाया गया. डोले पर कन्हैया और बलराम के बाल स्वरूप विराजमान थे. श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते हुए डोले के आगे-पीछे चलते रहे, जहाँ रास्ते में जगह-जगह फूलों और अबीर से यात्रा का भरपूर स्वागत किया गया.

चौराहों पर भव्य मंच सजाए गए थे, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करती हुई दिखीं. गलियों में होली गीतों और ‘जय राधे, जय कृष्णा’ के भजन गुंजायमान थे, जिन्होंने माहौल को और भक्तिमय बना दिया.

गोकुल की छड़ीमार होली रखती है अपनी अलग ही पहचान

उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में जहां लट्ठमार होली प्रसिद्ध है, वहीं गोकुल की छड़ीमार होली अपनी अलग ही पहचान रखती है. मान्यताओं के अनुसार, श्री हरी विष्णु जी के आठवें अवतार, भगवान श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम जी ने गोकुल में अपनी बाल लीलाएं कीं थीं. इस परंपरा के अनुसार, छड़ी पर गोटेदार कपड़ा लपेटा जाता है, ताकि प्रहार करते वक़्त किसी को चोट न पहुंचे.