उत्तर प्रदेश

कई देशों में फंसे UP के लोग, खामेनेई का बारंबकी से क्या रिश्ता?

Khamenei UP Connection: इजराइल–ईरान के बीच जारी जंग का असर उत्तरप्रदेश के लोगों पर भी पड़ रहा है। उत्तरप्रदेश के कई लोग बाहरी देशों में फंसे हुए है। अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटें कैंसिल होने के कारण लोग वतन वापस नहीं आ पा रहे। अमरोहा से रालोद नेता प्रवीण पोनिया अपने परिवार के साथ ओमान में फंस गए है। 

[caption id="attachment_137915" align="alignnone" width="1167"] अमरोहा का परिवार फंसा[/caption]

‘भगवान राम ही बचाएं’

इजराइल में फंसे सिद्धार्थनगर के एक परिवार का वीडियो भेजा है। वीडियो में वह बता रहे हैं कि वह कई देशों के लोगों के साथ एक बंकर में रह रहे हैं, जिनमें 12 भारतीय लोग शामिल हैं। यहां लगातार सायरन बज रहे हैं। सायरन सुनते ही सभी लोगों को बंकर में भागना पड़ता है। अब भगवान राम ही बचाएं।

कहां-कहां फंसे लोग

हाथरस के 3 लोग दुबई में फंस गए हैं। उनके परिजन परेशान हैं। बाराबंकी के 9 लोग ईरान के कुम में फंसे हुए हैं। बाहर फंसे लोगों ने सरकार से जल्द सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।  झांसी का एक परिवार ईरान में फंस गया है। सैयद नकी असकरी 12 साल पहले पढ़ाई करने ईरान गया था। बाद में अपनी पत्नी और 3 बच्चों को भी वहीं ले गया। लेकिन जंग के चलते परिवार से संपर्क टूट गया है। बाराबंकी के भी 24 लोग इजराइल में फंसे हैं। 

[caption id="attachment_137914" align="alignnone" width="1155"] बाराबंकी के रहने वाले मौलाना जफर अब्बास अपने बेटे युसूफ अब्बास ईरान में फंसे[/caption]

Khamenei UP Connection: UP की फ्लाइट्स कैंसिल

उत्तरप्रदेश से खाड़ी देशों की सभी फ्लाइटें कैंसिल कर दी गई हैं। लखनऊ से सऊदी अरब जाने वाली सभी फ्लाइटें रद्द कर दी गई। 

दुबई और रियाद की 2-2 फ्लाइटें, 

मस्कट, अबू धाबी, दम्माम और शारजाह की 1-1 फ्लाइट

वाराणसी एयरपोर्ट से दुबई जाने वाली 2 फ्लाइटें भी 4 मार्च तक के लिए रद्द कर दी गई हैं।

खामेनेई का बाराबंकी से रिश्ता

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद उत्तर प्रदेश का बाराबंकी चर्चा में आ गया है। खामेनेई के गुरु रूहोल्लाह खुमैनी के पूर्वज किंटूर गांव से जुड़े बताए जाते हैं। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति में इस गांव के वंशजों की भागीदारी रही।

ईरान की इस्लामिक क्रांति के सूत्रधार रूहोल्लाह खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में बाराबंकी के किंटूर में हुआ था। यह गांव शिया इस्लामी शिक्षा का एक केंद्र माना जाता रहा है।