मणिकूट पर्वत पर त्रयोदश ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा, हरिओम महाराज ने किया निरीक्षण
Jyotirlinga Pran Pratishtha Manikoot Mountain: ऋषिकेश से 20 किमी दूर, आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र मणिकूट पर्वत पर 13 से 15 फरवरी तक त्रयोदश ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट हरिओम महाराज ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।
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महाराज ने किया निरीक्षण
महाराज के अनुसार यह स्थान न केवल पौराणिक है बल्कि शिव-शक्ति की साक्षात ऊर्जा का संगम है। महाराज ने बताया कि उन्होंने कार्यक्रम में आने वाले भक्तों के लिए पेयजल विश्राम और दर्शन की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश आश्रम से जुड़े सदस्यों को दिए हैं। उन्होंने इस आयोजन को लेकर मुख्य बिंदुओं पर फोकस करते हुए बताया कि इस नवनिर्मित ज्योतिर्लिंग को गुजरेश्वर महादेव के रूप में नई पहचान मिलेगी। उनका दावा है कि देश के विभिन्न कोनों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सम्मिलित फल अकेले इस त्रयोदश ज्योतिर्लिंग के दर्शन से प्राप्त होगा।
[caption id="attachment_133238" align="alignnone" width="1363"]Jyotirlinga Pran Pratishtha Manikoot Mountain: मणिकूट पर्वत
मणिकूट पर्वत का उल्लेख शिव पुराण और वेदों में मिलता है। यह विश्व का एकमात्र पर्वत है जिसकी परिक्रमा का विधान है। यहां 11 कुंड निरंतर प्रज्जवलित हैं और 11 रुद्राक्ष के वृक्ष 11 रुद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। महाराज ने बताया कि 13 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान की शुरुआत होगी। विशेष अनुष्ठान के तहत 3 दिनों तक विशेष यज्ञ और पूजन होगा। शिवरात्रि के पावन अवसर पर ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी।
श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं
इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियों सहित हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा और सुविधाओं को देखते हुए प्रशासन और आश्रम की टीमें मुस्तैद हैं। महाराज ने भक्तों से इस पुण्य कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है। फिलहाल कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कार्यक्रम को व्यवस्थित और धार्मिक महत्व के साथ सफलता पूर्ण करने के लिए तमाम व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है।
संजय शर्मा की रिपोर्ट