April Pradosh Vrat 2026 Date: अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत? जानिए तिथि और मुहूर्त..

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April Pradosh Vrat 2026 Date: अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत? जानिए तिथि और मुहूर्त..

april pradosh vrat 2026 date अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत जानिए तिथि और मुहूर्त

April Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म हर दिन का विशेष महत्व होता है ऐसे में हर महिने में 2 बार प्रदोष व्रत आता है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत हर महिने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करते है। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं, उनकी कृपा उनके भक्तो पर बनी रहती है। प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल के समय पूजा करने का खास महत्व होता है।

क्या है इस व्रत का महत्व?

प्रदोष व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत हर महीने आता है। यह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत आता है। इस दिन भक्त व्रत रहते हैं, सुबह स्नान करके भगवान की पूजा करते है, इस दिन माता पार्वती की भगवान शंकर के साथ पूजा करते हैं।

  

अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां

कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत

पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मध्यरात्रि के बाद 12:12 बजे होगा।

यह तिथि 15 अप्रैल 2026, बुधवार को रात 10:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि 14 अप्रैल को प्रदोष काल बीतने के बाद ही त्रयोदशी शुरू हो रही है, इसलिए प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026 (बुधवार) को रखा जाएगा। इसे बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। प्रदोष काल मुहूर्त शाम 6:01 बजे से 7:31 बजे तक पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है।

शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत (भौम प्रदोष)

पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को शाम 6:51 बजे होगा। यह तिथि 29 अप्रैल 2026, गुरुवार को शाम 7:51 बजे समाप्त होगी। चूँकि प्रदोष काल 28 अप्रैल को ही पड़ रहा है, इसलिए प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को रखा जाएगा। इसे भौम प्रदोष या मंगल प्रदोष के नाम से पुकारा जाता है। प्रदोष काल मुहूर्त 28 अप्रैल के दिन शाम 6:51 बजे से 7:39 बजे तक का है।

कैसे करें पूजा? जानिए विधि

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ सुथरे वस्त्र पहने और गंगाजल से घर के मंदिर में छिड़काव करें। फिर एक चौकी में साफ कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर रखे फिर गंगाजल, दूध, दही, शहद से रुद्राभिषेक करें और बेलपत्र, फूल, अक्षत , चंदन , दीप – धूप आदि आर्पित करें। इस दिन भगवान भोलेनाथ का भजन करें ‘ओम नम: शिवाय’ मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान शिवजी और माता – पार्वती की सच्चे मन से आरती करनी चाहिए।

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