न्यूज11 भारत / पटना डेस्क: बिहार के औरंगाबाद जिले में शिक्षा विभाग की एक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इ-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी लगाने के नाम पर कई शिक्षकों ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 11 शिक्षक-शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा है।
कैसे पकड़ी गई गड़बड़ी?
शिक्षा विभाग जब फरवरी 2026 के उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच कर रहा था, तब अधिकारियों की नजर कुछ अजीब तस्वीरों पर पड़ी। नियमों के मुताबिक, हर शिक्षक को रोजाना ऐप पर अपनी नई फोटो अपलोड कर हाजिरी दर्ज करनी होती है। लेकिन जांच में पता चला कि कुछ शिक्षकों ने 14 फरवरी को खिंचवाई गई एक ही फोटो को 17 से 28 फरवरी तक लगातार इस्तेमाल किया। यानी घर बैठे या एक ही दिन की फोटो से रोज की हाजिरी बनाई जा रही थी।
इन स्कूलों के रिकॉर्ड में मिला झोल
जांच की आंच जिले के कई प्रखंडों तक पहुँची है। इसमें सदर प्रखंड के खरंजा मध्य विद्यालय, मदनपुर के बेला और बाजितपुर स्कूल, गोह के बेनी कैथी उच्च विद्यालय, कन्या मध्य विद्यालय, गणेशनगर मनिका, कुशा, हसनबार फुदकी और सागरपुर जैसे स्कूलों के नाम शामिल हैं। इन स्कूलों के शिक्षकों ने या तो फोटो के साथ हेराफेरी की या कई दिनों तक अपनी हाजिरी ही दर्ज नहीं की।
लापरवाह शिक्षकों के नाम
विभाग ने जिन शिक्षकों से जवाब मांगा है उनमें अभिनव तिवारी, अभिषेक आनंद, अभिषेक सिंह, अल्पना भारती, अमरेंद्र कुमार, अमरेंद्र कुमार ज्ञानी, अरविंद कुमार, अनामिका कुमारी, आशिष कुमार और अभिजीत कुमार शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने डिजिटल सिस्टम के साथ खिलवाड़ किया और पारदर्शिता के नियमों को ताक पर रखा।
48 घंटे की मोहलत, वरना होगी कड़ी कार्रवाई
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आरोपी शिक्षकों को 48 घंटे के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग का कहना है कि डिजिटल हाजिरी का मकसद स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि फोटो का खेल खेलना। अगर शिक्षकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वेतन रोकने जैसे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
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