साल 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है. देश का कार बाजार तकनीक, रेगुलेशन और सरकारी नीतियों के मामले में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बाजार में अब ‘मल्टी-पावरट्रेन स्ट्रेटजी’ यानी एक ही गाड़ी को कई तरह के ईंधन विकल्पों में उतारने की होड़ मची है.
जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) मुख्यधारा में आ रही हैं और हाइब्रिड कारों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वहीं अब फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) गाड़ियों का दौर भी शुरू होने वाला है. देश की दो सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियां- Maruti Suzuki और Tata Motors. इस साल के अंत तक भारत में अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कारें लॉन्च करने की पूरी तैयारी में हैं.
आखिर क्या है फ्लेक्स फ्यूल तकनीक?
सीधे शब्दों में समझें कि ये गाड़ियां आम पेट्रोल के साथ-साथ भारी मात्रा में इथेनॉल मिले ईंधन पर भी चल सकती हैं. ये इंजन E85 (85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल) या फिर E100 (लगभग 100% शुद्ध इथेनॉल) पर दौड़ने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. भारत पहले ही देश भर में 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) उपलब्ध करा चुका है.
इन गाड़ियों के आने से भारत की महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, पर्यावरण में प्रदूषण घटेगा और ग्राहकों के लिए गाड़ी चलाने का खर्च भी काफी कम हो जाएगा.
मारुति सुजुकी मोटर्स
मारुति सुजुकी ने साल 2025 के ‘जापान मोबिलिटी शो’ में अपनी लोकप्रिय कॉम्पैक्ट क्रॉसओवर फ्रॉन्क्स (Fronx) के फ्लेक्स-फ्यूल कॉन्सेप्ट मॉडल को पेश किया था. इस मॉडल के एक्सटीरियर पर चमकदार हरे रंग के ‘Flex Fuel’ स्टिकर्स लगाए गए थे, जबकि इसका डिजाइन, स्लोपिंग रूफलाइन और डाइमेंशन रेगुलर मॉडल जैसा ही था.
इसमें 17-इंच के आकर्षक ब्लैक अलॉय व्हील्स और क्रोम डिटेलिंग दी गई थी. मारुति के पास 1.2-लीटर और 1.5-लीटर के पेट्रोल इंजन हैं जो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को सपोर्ट करते हैं और कंपनी इन्हीं में से किसी एक इंजन का इस्तेमाल फ्रॉन्क्स FFV में कर सकती है.
टाटा मोटर्स
टाटा मोटर्स की तरफ से ‘टाटा पंच फ्लेक्स फ्यूल’ ब्रांड की पहली FFV कार बन सकती है. कंपनी ने इसे 2025 के ‘भारत मोबिलिटी शो’ में शोकेस किया था. इस कॉन्सेप्ट मॉडल में रेगुलर पंच वाला ही 1.2-लीटर, 3-सिलेंडर नेचुरल एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन दिया गया है. हालांकि, इसे फ्लेक्स-फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए इसके इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU), फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और एग्जॉस्ट सिस्टम को अपग्रेड किया गया है.
ये बदलाव इंजन को ईंधन में इथेनॉल की मात्रा को खुद डिटेक्ट करने और उसी हिसाब से एडजस्ट होने में मदद करते हैं. टाटा पंच पहले से ही पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक (EV) वर्जन में उपलब्ध है, और अब फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन आने से कंपनी का पोर्टफोलियो बेहद मजबूत हो जाएगा.