छत्तीसगढ़ में वर्ड फ्लू के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर : 300 सूअरों की मौत, 1...

bhilai-asf-outbreak-300-pigs-dead-farm-sealed

छत्तीसगढ़ में वर्ड फ्लू के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर : 300 सूअरों की मौत, 150 को इंजेक्शन देकर मारा

छत्तीसगढ़ में वर्ड फ्लू के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर  300 सूअरों की मौत 150 को इंजेक्शन देकर मारा 

छत्तीसगढ़ के भिलाई और दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) का गंभीर मामला सामने आया है। नारधा-मुडपार गांव स्थित एक बड़े सूअर फार्म में संक्रमण फैलने के बाद 300 से अधिक सूअरों की मौत हो गई, जबकि बीमारी को फैलने से रोकने के लिए बचे हुए करीब 150 सूअरों को पशुपालन विभाग ने इंजेक्शन देकर मार दिया। यह पूरी कार्रवाई जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत की गई और बाद में सभी शवों को गड्ढा खोदकर दफन किया गया।

रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही इलाके में अलर्ट

पशुपालन विभाग ने जब संदिग्ध मौतों के बाद सैंपल जांच के लिए भेजे, तो रिपोर्ट हाई सिक्योरिटी एनिमल डिसीज भोपाल में पॉजिटिव पाई गई। रिपोर्ट आने के तुरंत बाद विभाग की टीम, पशु चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी पीपीई किट पहनकर मौके पर पहुंचे और पूरे फार्म को कंट्रोल ज़ोन घोषित कर दिया गया। इसके बाद संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए इमरजेंसी कार्रवाई शुरू की गई और फार्म में मौजूद बचे सभी सूअरों को समाप्त किया गया।

एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान

फार्म मालिक के अनुसार, कुल 300 से 400 सूअर थे जिनमें से बड़ी संख्या में पहले ही बीमारी से मर चुके थे। वहीं कार्रवाई के दौरान 133 गर्भवती सूअर और बड़ी संख्या में छोटे पिगलेट्स भी शामिल थे, जिन्हें संक्रमण रोकने के लिए समाप्त करना पड़ा। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस पूरी घटना में फार्म को लगभग 1.2 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय पशुपालन व्यवसाय पर बड़ा असर पड़ा है।

फार्म सील निगरानी बढ़ी

घटना के बाद पशुपालन विभाग ने पूरे फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण को अन्य फार्मों तक फैलने से रोकना प्राथमिकता है, क्योंकि यह वायरस बेहद तेजी से फैलता है और जैव-सुरक्षा में छोटी सी चूक भी बड़े स्तर पर नुकसान का कारण बन सकती है।

क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर 

अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है जिसकी मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक मानी जाती है। यह बीमारी केवल सूअरों को प्रभावित करती है, लेकिन इसका असर पूरे सूअर पालन उद्योग पर विनाशकारी होता है क्योंकि इसका कोई वैक्सीन या स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस संक्रमित जानवरों, दूषित मांस या उपकरणों के जरिए फैलता है और लंबे समय तक वातावरण में सक्रिय रह सकता है, जिससे नियंत्रण बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

 

संबंधित सामग्री

विदेशी बनाम देसी

देश-विदेश

विदेशी बनाम देसी

उन्नत कृषि महोत्सव, CM डॉ. यादव बोले - रायसेन से 41 देशों में चावल होता है निर्यात

मध्य प्रदेश

उन्नत कृषि महोत्सव, CM डॉ. यादव बोले - रायसेन से 41 देशों में चावल होता है निर्यात

Do Not Take Risk For Beauty: क्या आप भी हर महिने खूबसूरत दिखने के लिए करते है ये काम? सावधान!

लाइफ स्टाइल

Do Not Take Risk For Beauty: क्या आप भी हर महिने खूबसूरत दिखने के लिए करते है ये काम? सावधान!

11 साल बाद जेल से बाहर आया रामपाल, जानिए इंजीनियर कैसे बना संत?

देश-विदेश

11 साल बाद जेल से बाहर आया रामपाल, जानिए इंजीनियर कैसे बना संत?

Salman-Ranveer Meet Bhima khunti: व्हीलचेयर क्रिकेटर से सलमान और रणवीर ने की मुलाकात!

मनोरंजन

Salman-Ranveer Meet Bhima khunti: व्हीलचेयर क्रिकेटर से सलमान और रणवीर ने की मुलाकात!