लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बारिश थमने के बावजूद बाढ़ का संकट कम नहीं हुआ है। प्रदेश के 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। करीब 10 हजार लोगों के सुरक्षित स्थानों पर जाने की सूचना है। कई इलाकों में सड़कों और गलियों में नावों से आवाजाही करनी पड़ रही है। गोमती रिवरफ्रंट को भी अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
लखीमपुर में बाढ़ के पानी में फंसा बाघ
लखीमपुर खीरी के बेल्हा सिकटिहा गांव में शारदा नदी के बढ़े जलस्तर के बीच एक बाघ फंस गया। वन विभाग की गोला और आरएसटी रेंज की टीमें मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। बाघ की लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। इसी जिले में बच्चों से भरी एक बोलेरो उफनते नाले में फंसकर पानी में डूब गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
कई जिलों में गांव जलमग्न
गोंडा के तरबगंज क्षेत्र में बाढ़ के पानी में नाव से गिरने के कारण नौ वर्षीय शिवा यादव की डूबने से मौत हो गई। कटरा बाजार क्षेत्र में टेढ़ी नदी के उफान पर आने से करीब 15 गांव प्रभावित हुए हैं। वहीं घाघरा नदी खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिले में करीब 30 गांवों के 25 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। सीतापुर में सरायन नदी खतरे के निशान से 1.62 मीटर ऊपर है, जबकि उन्नाव में सई नदी का पानी 12 से अधिक गांवों में पहुंच गया है। फर्रुखाबाद में कई पुल डूब गए हैं।
फतेहपुर में नाव पलटी, सभी सुरक्षित
फतेहपुर में पांडु नदी में 12 लोगों को लेकर जा रही नाव पलट गई। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है।
बारिश रुकने के बाद भी क्यों बढ़ रहा पानी?
विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहा है। इसके अलावा बैराज और जलाशयों से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी भी नदियों का जलस्तर बढ़ा रहा है। इसी कारण बारिश थमने के बावजूद लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी समेत कई जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर के मानसून सीजन में यूपी में सामान्य से करीब 8 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में कुल 802.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जिससे नदियों में पानी का दबाव बढ़ा है।