Haryana news: हरियाणा में प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हलचल मच गई जब राज्य सरकार ने दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अचानक सस्पेंड कर दिया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने बुधवार (8 अप्रैल) को जारी अलग-अलग आदेशों में राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर निलंबन की वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई ₹590 करोड़ के IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले की चल रही जांच से जुड़ी मानी जा रही है।
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निलंबन अवधि में चंडीगढ़ में करेंगे रिपोर्ट
सरकारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारी चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव (Services-I Branch) कार्यालय में रिपोर्ट करेंगे। उन्हें अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। राम कुमार सिंह जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकुला नगर निगम के आयुक्त रह चुके हैं, जबकि प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत थे।
सस्पेंशन से पहले अहम पदों पर थे दोनों अधिकारी तैनात
बताते चलें कि निलंबन से पहले राम कुमार सिंह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव और पंचकुला महानगर विकास प्राधिकरण में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वहीं प्रदीप कुमार परिवहन विभाग में विशेष सचिव और राज्य परिवहन निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दोनों अधिकारी राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस बने थे।
घोटाले की जांच में हुईं कई गिरफ्तारियां
हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच के दौरान बैंक कर्मचारियों, निजी व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बाद में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला भी लिया है, जिससे जांच और तेज होने की उम्मीद है।
फर्जी कंपनियों के जरिए हुआ करोड़ों का घोटाला
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया। विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से पैसा निकालकर इन फर्जी खातों में डाला गया। IDFC फर्स्ट बैंक ने हाल ही में चंडीगढ़ की एक शाखा में इस बड़े घोटाले का खुलासा किया था। इसके बाद फरवरी में हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी लेन-देन से अस्थायी रूप से हटा दिया था।
यह मामला अब राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।