Film Ghooskhor Pandat Controversy: 'घूसखोर पडंत' फिल्म के नाम में किया गया बदलाव!

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Film Ghooskhor Pandat Controversy: 'घूसखोर पडंत' फिल्म के नाम में किया गया बदलाव!

film ghooskhor pandat controversy  घूसखोर पडंत फिल्म के नाम में किया गया बदलाव

Film Ghooskhor Pandat Controversy: मशहूर एक्टर मनोज बाजपाय की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज होने से पहले फिल्म के टाइटल को लेकर काफी विवाद हुआ, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद इस फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडेय ने 19 फरवरी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया, जिसमें उन्होंने बताया कि - फिल्म का टाइटल 'घूसखोर पडंत' हटा दिया गया है। अब इसका कहीं इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

हालांकि अभी फिल्म का नया नाम तय नहीं किया गया, लेकिन जब भी फिल्म का नाम रखा जाएगा। तो वह सोच समझकर और पुराने टाइटल से बिल्कुल अलग होगा।

नीरज पांडेय ने कोर्ट को दी जानकारी

फिल्म के डायरेक्टर ने बताया कि- 'नया नाम फिल्म की कहानी और उद्देश्य को सही ढंग से दिखाएगा और कोई गलत मतलब नहीं निकलेगा। इसके अलावा पुराने नाम से जुड़े सभी पोस्टर, ट्रेलर और प्रचार सामग्री भी पहले ही हटा दी गई है।'

12 फरवरी को फिल्म का नाम बदलने के दिए थे आदेश

12 फरवरी के दिन इस फिल्म को लेकर सुनवाई की गई थी, जिसमें कोर्ट ने फिल्ममेकर और OTT नेटफ्लिक्स को फिल्म का नाम बदलने का आदेश दिया था। इस फिल्म की रिलीज की रोक की मांग करते हुए अतुल मिश्रा ने इस पर याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट का फिल्म के टाइटल को लेकर निर्देश

कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा था कि, -'ऐसे टाइटल का इस्तेमाल कर समाज के एक वर्ग को बदनाम क्यों कर रहे हैं? यह नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ है। इस नाम के साथ फिल्म रिलीज नहीं होगी।'

3 फरवरी को टीजर और फिल्म का टाइटल किया गया रिलीज

नेटफ्लिक्स पर 3 फरवरी के दिन 'घूसखोर पंडत' का टीजर रिलीज किया गया था, जिसके बाद काफी कॉट्रोवर्सी शुरु हो गई। जगह - जगह फिल्म के टाइल को लेकर प्रदर्शन भी किए गए।
फिल्म के प्रोड्यूसर ने फिल्म को लेकर दी थी सफाई

फिल्म को लेकर प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने लिखा था कि- “हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है।”

उन्होंने आगे लिखा कि-

‘एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है।’

‘फिल्म को देखने के बाद आंका जाए’- प्रोड्यूसर

‘हम समझते हैं कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और हम उन भावनाओं का सम्मान करते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमने फिलहाल फिल्म से जुड़ा सारा प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखकर और उसकी कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि सिर्फ कुछ झलकियों के आधार पर उसे आंका जाए। मैं जल्द ही यह फिल्म दर्शकों के साथ शेयर करने के लिए उत्सुक हूं।’

फिल्म को लेकर क्यों हो रहा विवाद?

फिल्म के टाइटल ‘घूसखोर पंडत’ पर कई लोगों ने आपत्ति जाहिर की है। उनका कहना है कि ‘पंडत’ शब्द आम तौर पर ब्राह्मण समाज और धार्मिक विद्वानों से जुड़ा है, लेकिन इसके साथ ‘घूसखोर’ शब्द जोड़ना बहुत गलत है।

लोगों का कहना है कि, ‘इस टाइटल के जारिए ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है।’

       

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