नानी की नई फिल्म द पैराडाइज गुरुवार 24 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म का कोई ट्रेलर नहीं आया था, फिर भी दर्शक थिएटर पहुंचे। वजह रही अनिरुद्ध रविचंद्र का म्यूजिक और नानी का स्टारडम। श्रीकांथ ओडेला के निर्देशन वाली यह पीरियड ड्रामा फिल्म कैसी है, यह देखने के लिए हमने पूरी फिल्म देखी। रिव्यू में इसे 5 में से 2 स्टार मिले हैं।
हाइप के सहारे आई फिल्म
कुछ फिल्में सिर्फ स्टार और उनके आभामंडल के दम पर बड़ा माहौल बना लेती हैं। हाल में यश की टॉक्सिक ने 100 करोड़ की ओपनिंग ली और राम चरण की पेद्दी ने भी खूब बज बनाया। साउथ की फिल्मों का क्रेज अब उत्तर भारत में भी जबरदस्त है। दोनों फिल्मों ने पहले हफ्ते में अच्छी कमाई की। लेकिन रिव्यू आने के बाद कलेक्शन गिरा। कहानी को लेकर दोनों को ट्रोल भी किया गया। अब नानी की बारी है। फिल्म के गाने और कलाकारों की प्रेजेंटेशन पहले से लोगों को भा चुकी थी।
क्या है द पैराडाइज की कहानी
कहानी 1980 के दशक के सिकंदराबाद, आंध्र प्रदेश की एक बस्ती पैराडाइज की है। आजादी के बाद से यहां का एक पिछड़ा समुदाय अपनी पहचान के लिए जूझ रहा है। बस्ती के लोग मलिक नाम के शख्स का अत्याचार सहते हैं। मलिक का किरदार मोहन बाबू ने निभाया है। वह नहीं चाहता कि बस्ती को पहचान मिले। लोग खाने की कमी और कमाई के अनिश्चित साधनों के बीच अमानवीय हालात में जी रहे हैं।
इसी बस्ती में जादल यानी नानी अपनी मां शमक्का के साथ रहता है। शमक्का का किरदार सोनाली कुलकर्णी ने निभाया है। बेटे को बड़ा करने के लिए वह हर तकलीफ झेलती है। बड़ा होकर जादल बस्ती के लोगों को पहचान दिलाने की लड़ाई में उतर जाता है। इस राह में उसकी दुश्मनी मलिक और उसके बेटे विक्रम से हो जाती है। विक्रम का रोल राघव जुयाल ने किया है। सवाल यह है कि क्या जादल बस्ती के लोगों को देश का नागरिक बना पाएगा।