हिमाचल में दलबदल पर सख्ती: अब अयोग्य विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन, सुक्खू सरकार ने लिया फैसला

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हिमाचल में दलबदल पर सख्ती: अब अयोग्य विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन, सुक्खू सरकार ने लिया फैसला

हिमाचल में दलबदल पर सख्ती अब अयोग्य विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन सुक्खू सरकार ने लिया फैसला

Himachal news: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में दलबदल पर लगाम कसने के लिए सुक्खू सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन पारित हुए संशोधन विधेयक के तहत अब दल-बदल के चलते अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।

संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित

[caption id="attachment_145201" align="alignnone" width="1200"]Representative image Representative image[/caption]

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में ‘विधायकों के वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2026’ को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। भाजपा के विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर कायम रही। यह संशोधन 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव के रूप में लाया गया है, जिसमें विधायकों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

दल-बदल करने वालों पर लागू किया गया सख्त प्रावधान

नए कानून के अनुसार, यदि कोई विधायक संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम विधायकों को पार्टी लाइन के खिलाफ जाने से रोकेगा और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।

इन पूर्व विधायकों पर पड़ेगा असर

बताते चलें कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ मतदान किया था, जिसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उपचुनाव में इनमें से केवल दो ही दोबारा जीत सके। नए कानून के लागू होने के बाद पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा (गगरेट) और देवेंद्र कुमार भुट्टो (कुटलैहड़) को पेंशन से वंचित होना पड़ेगा। दोनों को फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के कारण अयोग्यता झेलनी पड़ी थी।

[caption id="attachment_144201" align="alignnone" width="1200"]हिमाचल विधानसभा हिमाचल विधानसभा[/caption]

लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाया कदम: सीएम सुक्खू

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस फैसले को जनादेश की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन राजनीतिक खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने और विधायकों को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

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