Maihar Maa Sharda Temple: ऐसा मंदिर जहां पट खुलने के पहले पूजा करने आते हैं आल्हा-उदल!

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Maihar Maa Sharda Temple: ऐसा मंदिर जहां पट खुलने के पहले पूजा करने आते हैं आल्हा-उदल!

maihar maa sharda temple ऐसा मंदिर जहां पट खुलने के पहले पूजा करने आते हैं आल्हा-उदल

Maihar Maa Sharda Temple: देशभर में कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं, लेकिन शारदा देवी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और रहस्यों की वजह से विशेष पहचान रखता है। यह मंदिर मध्यप्रदेश के सतना शहर से करीब 33 किमी. की दूरी पर मंदिर में स्थित है। मान्यता है कि, यहां आज भी वीर योद्धा आल्हा और उदल माता रानी की पूजा करने आते है। यह मंदिर देशभर में मैहर की माता शारदा के नाम से प्रसिद्ध है।

Maihar Maa Sharda Temple: रहस्यों से भरा है यह प्राचीन मंदिर

मां शारदा के इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं और रहस्य आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। मां मान्यता है कि, शारदा के मंदिर में मंदिर खुलने से पहले मां की प्रतिमा पर पुष्प चढ़े हुए और पूजा की हुई मिलती है।

 

भक्त बताते हैं कि, स्थानीय लोगों के अनुसार, रात में मंदिर बंद होने के बाद भी कई बार अंदर से घंटियों की आवाज सुनाई देती है। मान्यता है कि मां शारदा के परम भक्त Alha और Udal आज भी यहां आकर माता की आराधना करते हैं। कहा जाता है कि, इनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने अमरत्व का वरदान दिया था।

मां के दर्शन के लिए चढ़नी पड़ती हैं सकड़ो सीढ़ियां

यह मंदिर विंध्याचल पर्वत पर बना हुआ है, जहां श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने के बाद मां के दर्शन होते हैं। मंदिर परिसर की एक गुफा में पिछले करीब 50 वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है।

इस मंदिर की खास बात यह है, यहां 12 महिने भक्तों का तांता लगा रहता है।

नवरात्रि में लगता है भव्य मेला

मैहर में हर साल नवरात्रि में 9 दिनों तक मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देशभर के कोने कोने से लाखों की तादाद में अपनी-अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दर्शन करने आते हैं।

मां शारदा देवी सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यहां पर श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार से परेशानी ना हो उसके लिए प्रशासन पूरी तरीके से 9 दिनों तक चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के साथ मुस्तैद रहेगा।

प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है मैहर

मध्य प्रदेश के शारदा माता के मंदिर को प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे, तब इसी स्थान पर देवी के गले का हार गिरा था। इसी वजह से इस जगह का नाम ‘माई का हार’ पड़ा, जो आगे चलकर 'Maihar' के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

मान्यता है कि, जहां-जहां देवी सती के शरीर के अंग गिरे, वे स्थान "शक्ति पीठ" कहलाए। पूरे देश में ऐसे कुल 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं।

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