उज्जैन बोरवेल हादसा: जिंदगी की जंग हारा भागीरथ, सीएम ने जताया दुख

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उज्जैन बोरवेल हादसा: जिंदगी की जंग हारा भागीरथ, सीएम ने जताया दुख

उज्जैन बोरवेल हादसा जिंदगी की जंग हारा भागीरथ सीएम ने जताया दुख

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर में 2 साल के मासूम भागीरथ देवासी की बोरवेल में गिरने से मौत हो गई। करीब 200 फीट गहरे बोरवेल में फंसे बच्चे को बचाने के लिए 22 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे जिंदा नहीं निकाला जा सका.एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने लोहे की छड़, रस्सी और मोटर निकालने वाली मशीनों की मदद से अंततः बच्चे का शव बाहर निकाला। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

सीएम ने जताया दुख, 4 लाख सहायता की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतक बच्चे के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मौके पर कलेक्टर, एसपी समेत कई एजेंसियों की टीमें मौजूद थीं, इसके बावजूद सफलता नहीं मिल सकी.सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर संसाधन और मैनपावर मौजूद होने के बावजूद आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग क्यों नहीं हो पाया।

रेस्क्यू टीम की कोशिश नाकाम

रेस्क्यू की शुरुआत रेस्क्यू रॉड और अंडरवाटर कैमरे से की गई, लेकिन ये उपकरण केवल 50-55 फीट तक ही प्रभावी थे। शुरुआती समय में बच्चा 35 फीट पर था, लेकिन बार-बार असफल प्रयासों के कारण वह 70 फीट तक नीचे खिसक गया।इसके बाद प्लास्टिक पाइप और प्राइवेट कैमरे का सहारा लिया गया, लेकिन ये भी गहराई में स्थिरता और स्पष्ट दृश्य देने में विफल रहे।रेस्क्यू के शुरुआती 8 घंटे तक केवल एक ही रणनीति अपनाई गई। जब यह बार-बार विफल रही, तब वैकल्पिक योजना पर काम शुरू किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, मल्टी-लेयर प्लानिंग पहले से होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।

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