मिडिल ईस्ट तनाव पर PM मोदी की मैराथन बैठक, ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस

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मिडिल ईस्ट तनाव पर PM मोदी की मैराथन बैठक, ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस

मिडिल ईस्ट तनाव पर pm मोदी की मैराथन बैठक ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस

PM Modi meeting: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। रविवार शाम प्रधानमंत्री आवास पर हुई हाई-लेवल बैठक में साफ संकेत दिया गया कि भारत फिलहाल ‘वॉच एंड एक्ट’ मोड में है। सवाल सिर्फ हालात समझने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि देश में पेट्रोल, गैस और बिजली की सप्लाई कहीं अटक न जाए।

PM Modi meeting: PM आवास पर हाई-लेवल मीटिंग

नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित 7 लोक कल्याण मार्ग पर वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। इसमें पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे अहम सेक्टर की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह, एस. जयशंकर, निर्मला सीतारमण, शिवराज सिंह चौहान और जेपी नड्डा समेत कई मंत्री मौजूद रहे। चर्चा का फोकस साफ था—अगर वैश्विक सप्लाई चेन और प्रभावित होती है, तो भारत के पास क्या विकल्प हैं।

PM Modi meeting: बैकअप प्लान पर काम तेज

दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने दुनिया भर में ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। यही वजह है कि भारत सरकार पहले से ही तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान पर काम कर रही है।इससे पहले 12 मार्च को भी प्रधानमंत्री ने संकेत दिया था कि यह संकट सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि एक तरह से ‘राष्ट्रीय धैर्य की परीक्षा’ भी है। उन्होंने तब कहा था कि हालात से निपटने के लिए संयम और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से चिंता और बढ़ गई है। दुनिया की करीब 20% ऊर्जा सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। हालिया हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद यहां जोखिम बढ़ा है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ना तय है।

कई देशों से बातचीत

स्थिति को संभालने के लिए भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रियता बढ़ाई है। सरकार की ओर से सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान समेत कई देशों के नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन में रुकावट कम से कम हो।

नजरें हालात पर टिकीं

फिलहाल सरकार हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। बाजार और सप्लाई दोनों पर दबाव बना हुआ है—अब निगाहें इस पर हैं कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट का तनाव किस दिशा में जाता है और उसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कितना असर पड़ता है।

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