RAJASTHAN NEWS : आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 महीने की दी अंतरिम जमानत

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RAJASTHAN NEWS : आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 महीने की दी अंतरिम जमानत

rajasthan news  आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 महीने की दी अंतरिम जमानत

Asaram interim bail Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए आसाराम को छह महीनों की अंतरिम जमानत प्रदान की है। अदालत ने माना कि आरोपी वर्तमान में निजी अस्पताल में भर्ती है कि उसे जेल भेजा जा सके। अदालत ने यह जमानत चिकित्सा आधार पर दी है जिससे आरोपी का इलाज सुचारू रूप से जारी रह सके।

अदालत का आदेश

अदालत ने चिकित्सकीय रिपोर्ट और डॉक्टरों की सिफारिश को देखते हुए कहा कि न्याय प्रणाली मानवता के सिद्धांतों पर आधारित है और ऐसे मामलों में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी आधार पर आरोपी को छह महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की गई।

मेडिकल रिपोर्ट का हवाला

वकील ने अपने पक्ष में डॉक्टरों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि आरोपी को गंभीर हृदय और श्वसन संबंधी समस्या है। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा कि नियमित चिकित्सा देखभाल और सही वातावरण में ही उसकी स्थिति में सुधार हो सकता है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा, कि मरीज की हालत लगातार निगरानी की मांग करती है और किसी भी तरह का दबाव या तनाव उसकी स्वास्थ्य स्थिति को और बिगाड़ सकता है। READ MORE : सरकार ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के काम करने पर रोक लगा दी

राज्य सरकार ने की आपत्ति

राज्य सरकार ने प्रारंभिक तौर पर जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपी पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जमानत केवल चिकित्सकीय आधार पर दी जा रही है। यह स्थायी नहीं है और छह महीने बाद आरोपी को फिर से अदालत में प्रस्तुत होना होगा अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी इलाज के दौरान किसी भी अनैतिक गतिविधि में शामिल न हो और स्थान परिवर्तन करने से पहले पुलिस और अदालत को सूचित करे।

निगरानी की व्यवस्था

कोर्ट ने पुलिस प्रशासन और जेल विभाग को निर्देशित किया कि आरोपी के इलाज की पूरी निगरानी की जाए और आवश्यक हो तो मेडिकल अपडेट नियमित रूप से पेश किए जाएं। और यदि आरोपी अपनी स्थिति का दुरुपयोग करता पाया गया, तो उसकी जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

मानवता और न्याय का संतुलन

राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक संवेदनशीलता का उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर कानून के दायरे में रहकर अपराध की गंभीरता पर विचार किया, वहीं दूसरी ओर मानव जीवन के अधिकार की रक्षा को भी सर्वोपरि रखा।  

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