Jharkhand news: असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी रणनीति को तेज कर दिया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को चुनावी मैदान में उतरते हुए पार्टी के अभियान की कमान अपने हाथों में ले ली है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम असम पहुंचने के बाद वह 28 मार्च से चुनावी प्रचार का औपचारिक आगाज करेंगे। सूत्रों की मानें तो उनका पहला कार्यक्रम कोकराझार जिले के गोसाई गांव विधानसभा क्षेत्र में तय किया गया है, जहां वे एक विशाल जनसभा को संबोधित कर चुनावी माहौल को धार देंगे।
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झारखण्ड सीएम हेमंत सोरेन[/caption]
गोसाई गांव से होगी शुरुआत, कई क्षेत्रों में सोरेन करेंगे जनसभाएं
झारखण्ड सीएम सोरेन का यह दौरा महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। वह अगले कुछ दिनों तक असम में रहकर विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में लगातार जनसभाएं करेंगे और पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाएंगे। झामुमो इस चुनाव को अपने राष्ट्रीय विस्तार और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।
खुद कमान संभाल रहे सोरेन
पार्टी अध्यक्ष के रूप में हेमंत सोरेन खुद पूरे चुनावी अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। झामुमो ने यह साफ कर दिया है कि वह असम में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है और इसके लिए संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्टी महासचिव विनोद पांडेय असम में डेरा डाले हुए हैं और स्थानीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
20 स्टार प्रचारकों की टीम बन कर हुई तैयार
झामुमो ने अपने 20 स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को शुक्रवार को सौंप दी है। इस सूची में हेमंत सोरेन के अलावा डॉ. सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा, कल्पना मुर्मू सोरेन, अभिषेक प्रसाद और डॉ. महुआ माजी जैसे प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा, पार्टी के कई मंत्री और विधायक पहले ही असम पहुंचकर जमीनी स्तर पर प्रचार को गति दे रहे हैं।
स्थानीय मुद्दों पर फोकस, चुनिंदा सीटों पर नजर
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झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का चिन्ह[/caption]
झामुमो की रणनीति असम के चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने पर केंद्रित है। पार्टी स्थानीय सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हेमंत सोरेन की जनसभाएं न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगी, बल्कि झामुमो को नए क्षेत्रों में पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी।