RAJASTHAN NEWS : राजस्थान के मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

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RAJASTHAN NEWS : राजस्थान के मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

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Mukundra Tiger Reserve Rajasthan tiger boost : मुकंदरा टाइगर रिजर्व, राजस्थान में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वन विभाग तैयारी कर रहा है। नवंबर 2025 में मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से बाघों की शिफ्टिंग की जाएगी, जिससे क्षेत्र का बाघ संरक्षण और पर्यटन दोनों को नया जीवन मिलेगा.​

मुकंदरा में बाघों का आंकड़ा

मुकंदरा टाइगर रिजर्व में कुल एक बाघ, दो बाघिन और एक शावक हैं। हाल ही में रणथंभौर से भी एक मादा शावक को इस रिजर्व में लाया गया था। इनमें से दो बाघिन और एक शावक अभी खुले जंगल में हैं, जबकि एक बाघिन 5 हेक्टेयर सॉफ्ट एनक्लोजर में रखी गई है.​

नवंबर में पेंच से बाघ शिफ्टिंग

वन विभाग ने पेंच से बाघों की शिफ्टिंग के लिए योजना और इंटर-स्टेट स्वीकृतियां पूरी कर ली हैं। नवंबर मध्य तक यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है। फिलहाल एनक्लोजर और जंगली क्षेत्र का काम तेजी से चल रहा है. इस बार पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और तडोबा जैसे मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व से पांच बाघिन और दो बाघ मुकंदरा,रामगढ़ विषधारी रिजर्व में शिफ्ट किए जाएंगे.​ READ MORE :यूपी,पंजाब के बाद राजस्थान पराली जलानें में चौथे स्थान पर

शिफ्टिंग कैसे होगी?

बाघों को ट्रैंक्विलाइज़ करके लाया जाएगा और पहले सुरक्षित एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा। धीरे-धीरे उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा, वह प्राकृतिक माहौल में ढल सकें। इसके लिए 1 हेक्टेयर एनक्लोजर को 30 लाख रुपये खर्च कर तैयार किया जा रहा है.​

वन विभाग की रणनीति

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और केंद्र सरकार ने मुकंदरा-रामगढ़ को राजस्थान का नया टाइगर हब बनाने की स्वीकृति दे दी है। इससे बाघों की संख्या बढ़ेगी और राज्य के बायोडायवर्सिटी, इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. विभाग ने स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।​

क्या बदल सकता है?

शिफ्टिंग के बाद मुकंदरा में बाघों की संख्या चार से बढ़कर सात-आठ हो सकती है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बहाल होगा। पर्यावरणविद् मानते हैं कि यह पहल न सिर्फ बाघ संरक्षण, बल्कि राजस्थान के वन्य जीवन पर्यटन को भी नई पहचान देगी.​  मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पेंच के बाघों की शिफ्टिंग नवंबर में पूरी होगी। इससे न केवल रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को भी योगदान मिलेगा. सरकार और वन विभाग की पहल राजस्थान को बाघों के लिए नई सुरक्षित पहचान दिलाने की दिशा में सकारात्मक कदम है  

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