मध्य प्रदेश में UCC प्रगति पर

UCC से अलग रहेगा जनजातीय समुदाय, सीएम मोहन ने दिल्ली में कर दी बड़ी घोषणा

मध्य प्रदेश सरकार ने UCC को लागू करने की प्रक्रिया तेज की, जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया।

UCC से अलग रहेगा जनजातीय समुदाय, सीएम मोहन ने दिल्ली में कर दी बड़ी घोषणा

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी।

एक देश, एक कानून की पैरवी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में "एक निशान, एक विधान और एक कानून" की भावना राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। उनके अनुसार, पूरे देश में समान कानून लागू होने की अवधारणा में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सहित कुछ राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है और मध्य प्रदेश भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति

यूसीसी के प्रारूप और प्रावधानों की समीक्षा के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। समिति विभिन्न राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर रही है और प्रदेश के अलग-अलग वर्गों से सुझाव भी ले रही है। जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से राय एकत्र की जा रही है।

आदिवासी परंपराओं की होगी सुरक्षा

सीएम ने साफ किया कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक व्यवस्थाओं को किसी भी तरह प्रभावित नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि जनजातीय समाज की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है। इसी कारण उन्हें यूसीसी से अलग रखने का निर्णय लिया गया है।

गुजरात मॉडल पर विचार

सरकार इस मामले में गुजरात के मॉडल का अध्ययन कर रही है, जहां जनजातीय समुदाय को विशेष छूट दी गई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

सरकार के इस फैसले को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर यूसीसी लागू करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समुदाय की परंपराओं को सुरक्षित रखने का संदेश भी दिया गया है। अब सभी की नजर समिति की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
 

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