आमला। स्थानीय स्तर पर प्रचारित 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य शिविर और नवीन जनपद पंचायत भवन के भूमि पूजन कार्यक्रम में अपेक्षित जनभागीदारी नहीं दिखाई दी। कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के शामिल होने की बात कही गई थी, लेकिन उनके नहीं पहुंचने से आयोजन को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का आधिकारिक कारण अपरिहार्य व्यस्तता बताया गया।
व्यवस्थाओं को लेकर भी उठे सवाल
कार्यक्रम स्थल पर टेंट, बैठक और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अव्यवस्था की स्थिति नजर आई। करोड़ों रुपये की लागत से प्रस्तावित नवीन जनपद पंचायत भवन के भूमि पूजन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में व्यवस्थाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए। आयोजन को लेकर प्रशासन की तैयारियों और मौके की स्थिति में अंतर दिखाई देने की चर्चा भी रही।
पंडाल में कर्मचारी और समूह की महिलाएं
कार्यक्रम में आम लोगों की अपेक्षित मौजूदगी नहीं रही। पंडाल में स्वास्थ्य विभाग, जनपद पंचायत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और स्व-सहायता समूहों की महिलाएं ही बड़ी संख्या में दिखाई दीं। स्थानीय लोगों का कहना था कि कार्यक्रम का व्यापक प्रचार किए जाने के बावजूद आम जनता की भागीदारी कम रही।
प्रभारी मंत्री के नहीं पहुंचने से चर्चाएं तेज
प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के हाथों नवीन जनपद पंचायत भवन का भूमि पूजन प्रस्तावित था। उनके नहीं पहुंचने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसके कारणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से उनके नहीं पहुंचने का कारण व्यस्तता बताया गया है। ऐसे में वास्तविक कारण को लेकर स्थिति आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी।
पानी की व्यवस्था को लेकर नाराजगी
कार्यक्रम स्थल पर मंच और पंडाल की व्यवस्थाओं को लेकर भी लोगों में असंतोष की बात सामने आई। आयोजकों की ओर से अतिथियों के लिए जलपान की व्यवस्था किए जाने के बीच पंडाल में मौजूद कुछ महिलाओं और आम लोगों ने पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की। इससे आयोजन स्थल पर नाराजगी की स्थिति बनी।
हाट बाजार के दिन भी कम रही भागीदारी
शनिवार को आमला में साप्ताहिक हाट बाजार होने के बावजूद कार्यक्रम में आम लोगों की मौजूदगी कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार के लिए बड़ी संख्या में लोगों के आने के बावजूद आयोजन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी। कुछ लोगों के अनुसार पर्याप्त बैठक व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी हुई और वे कार्यक्रम स्थल से लौट गए। कार्यक्रम में कम जनभागीदारी ने अभियान के प्रचार-प्रसार और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है। हालांकि, कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का आकलन सरकारी योजनाओं के लाभ और स्वास्थ्य शिविर में लोगों को मिली सेवाओं के आधार पर किया जाना अधिक उचित होगा।