Uttarakhand UCC Day CM Dhami: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के एक साल पूरा हो चुका है। इसको लेकर राज्यभर में ‘UCC दिवस’ मनाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून के गढ़ी कैंट में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और UCC को महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों से जोड़कर बताया।
किसी बेटी के साथ धोखा नहीं होगा
मुख्यमंत्री धामी ने लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को लेकर कहा कि इसे इसलिए अनिवार्य किया गया है ताकि किसी बेटी के साथ धोखा न हो, ताकि कोई बेटी टुकड़ों में न मिले और माता-पिता को यह पता रहे कि उनकी बेटी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि यह फैसला राजनीति नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
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‘UCC दिवस’ मना रहा उत्तराखंड[/caption]
Uttarakhand UCC Day CM Dhami: धर्म के खिलाफ नहीं UCC
CM धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सभी को समान अधिकार देना, महिलाओं को न्याय दिलाना और कुप्रथाओं को खत्म करना है। उन्होंने इसे देवभूमि उत्तराखंड से देश को मिलने वाला समानता का संदेश बताया।
CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब चुनाव से पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात की गई थी, तब कई लोगों ने इसका मजाक उड़ाया। विपक्ष ने कहा था कि यह सिर्फ एक घोषणा है और इसे लागू करना संभव नहीं है, लेकिन राज्य सरकार ने कमेटी गठन से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया अपनाकर 27 जनवरी 2025 को UCC लागू कर दिया।
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धर्म के खिलाफ नहीं UCC - CM[/caption]
हलाला, बहुविवाह के मामले खत्म
CM धामी ने दावा किया कि UCC लागू होने के बाद हलाला, बहुविवाह और 3 तलाक का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कहीं ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। CM ने इसे महिला सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बताया।
क्या है UCC?
Uttarakhand UCC Day CM Dhami: समान नागरिक संहिता, इसका मतलब है कि शादी, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे निजी मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग नियम नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक जैसी ही कानूनी व्यवस्था होगी।
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि इसी सोच के साथ UCC लागू किया गया। हालांकि इसमें ST को छूट दी गई है। यानी राज्य के अनुसूचित जनजाति वाले लोग UCC के दायरे से बाहर रहेंगे।