वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान करने वाले प्रतिबंध विधेयक को फिलहाल आगे बढ़ने से रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को संबंधित आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि यह निर्णय अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। प्रस्तावित कानून के लागू होने पर भारत और चीन जैसे देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।
रूस की कमाई रोकने के लिए लाया गया था विधेयक
रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने की इस पहल का उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए रूस को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर अंकुश लगाना था। अमेरिकी संसद में प्रस्तुत इस विधेयक में रूस से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, ट्रम्प के ताजा फैसले से इस प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया गया है। इससे भारत को संभावित अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्यों अहम है रूस से तेल का कारोबार?
भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अगस्त 2026 में देश के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत बताई गई थी। इस दौरान भारत ने रूस से प्रतिदिन औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा।
ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाए जाने की आशंका भारत की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया था कि भारत अपनी ऊर्जा संबंधी जरूरतों का निर्धारण तेल की उपलब्धता, कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करता है।
तेल की बढ़ती कीमतों ने बदली अमेरिकी रणनीति
रूस से तेल की आपूर्ति घटने और पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भी तेल आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे हालात में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
अमेरिका में भी पेट्रोल की बढ़ती कीमतें ट्रम्प सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई और पेट्रोल की कीमतें मतदाताओं के लिए अहम मुद्दे बन सकती हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति बनाए रखना अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
रूस से डीजल खरीदने के समझौते पर भी सवाल
खास बात यह है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने के समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत अमेरिका ने रूसी डीजल की बिक्री से जुड़ी कुछ पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दी। इस कदम को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय अधिकारियों ने नाराजगी जताई है।
अमेरिकी संसद के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सदस्यों ने भी इस छूट को वापस लेने की मांग की है। ऐसे में ट्रम्प का ताजा फैसला रूस पर प्रतिबंधों, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।