उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गलन भरी ठंड अभी और कंपकंपी छुड़ाएगी। उत्तर पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से गंगा के मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ेगी। इस बार सर्दी का मौसम मार्च महीने तक खिंचने की संभावना है। इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में ला नीना प्रभाव का और अधिक सक्रिय होना बताया जा रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 2013 में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी जब ला नीना प्रभाव के कारण सर्दी अधिक समय तक बनी रही थी। वर्तमान में ला नीना प्रभाव जनवरी के महीने में भी सक्रिय बना हुआ है जो आने वाले हफ्तों में भी ठंड के बने रहने का संकेत दे रहा है।
बंगाल की खाड़ी से नमी और घने कोहरे का खतरा
बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से कानपुर परिक्षेत्र में लगातार नमी आ रही है। इस नमी के कारण रात में आकाश में ऊंचे बादल बनेंगे और धुंध की घनी चादर छा जाएगी जिससे कोहरे की स्थिति भी बनी रहेगी। हालांकि, इस दौरान बारिश की संभावना नहीं है। दिन में धूप निकलने के बावजूद ठंड का अहसास बना रहेगा।
कड़ाके की ठंड बढ़ने की संभावना
उत्तर भारत में ला नीना के कारण बढ़ रही है कड़ाके की ठंड
उत्तर भारत में ला नीना प्रभाव के कारण ठंड की अवधि मार्च तक बढ़ने की संभावना है। ठंड और घने कोहरे की स्थिति जारी रहेगी।
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