हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार की योजनाओं का खाका पेश किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा और धर्मशाला में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय कारोबार, होटल उद्योग और रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, धर्मशाला में क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इससे शहर को पर्यटन के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में भी पहचान मिलेगी। इसी कड़ी में दिसंबर में धर्मशाला में नॉर्थ जोन अधिवेशन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे आयोजनों के जरिए सालभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहे और स्थानीय व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
होटल ऑक्यूपेंसी 75 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनके ठहरने की अवधि और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार करना भी जरूरी है। सरकार का लक्ष्य होटलों की ऑक्यूपेंसी यानी कमरों में पर्यटकों के ठहरने की दर को 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए धर्मशाला और कांगड़ा में बड़े आयोजनों के साथ नई पर्यटन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नई स्केटिंग परियोजना जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख किया, जिनसे पर्यटकों को आकर्षित करने और मनोरंजन के नए विकल्प विकसित करने में मदद मिल सकती है। पर्यटन क्षेत्र के विस्तार से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य संबंधित व्यवसायों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजना कांगड़ा को ऐसी पर्यटन पहचान देना है, जिससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।