फाल्ता में हालत खास्ता होने के डर से भागी टीएमसी! या फिर पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा!

By Pramod Kumar,News11 Bharat,
फाल्ता में हालत खास्ता होने के डर से भागी टीएमसी! या फिर पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा!

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: अभी कुछ दिनों तक शेर की तरह पश्चिम बंगाल में दहाड़ने वाली पार्टी दुम दबाने लगी है. पश्चिम बंगाल में 293 सीटों के चुनाव परिणाम आने के बाद 21 मई को एकलौती सीट फाल्ता पर पुनर्मतदान होना है, लेकिन टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है. हार की वजह तो एक बात है, लेकिन राज्य में जिस तरह से टीएमसी के बीच मतभेद उभरने लगे हैं, उसी का परिणाम है यहा 'चुनाव पलायन'.

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्ता विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार थे, जहांगीर खान. लेकिन उन्होंने महज दो दिनों पहले बाजाप्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और अजीबोगरीब बयान देकर खुद को चुनाव से अलग होने का ऐलान कर दिया. अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहांगीर खान ने फाल्ता के लिए विशेष पैकेज की मांग की. उनका यह बयान ही अजोबीगरीब है, क्योंकि इस तरह के पैकेज की मांग पूरे राज्य के लिए किया जाता है, किसी एक विधानसभा के लिए नहीं. जिस प्रकार से दूसरे राज्यों के लिए विशेष पैकेज की मांग उठती रहती है, उस प्रकारकी मांग पश्चिम बंगाल के लिए कभी नहीं उठी. सिर्फ किसी आपदा के वक्त राहत कोष या किसी वित्तीय संकट के वक्त वित्तीय राहत की मांग अवश्य उठी है. इसलिए जहांगीर खान की इस तरह की विशेष पैकेज की मांग की समझ से परे और अपने निर्णय को लेकर लीपापोती वाली बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है. क्योंक अपने निर्णय के पीछे कोई और कारण भी उन्होंने नहीं बताया. जहांगीर खान के चुनाव हटने के बाद पार्टी में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने इस निर्णय को उम्मीदवार का अपना निर्णय कह कर टालने वाला बयान तो जरूर दे दिया, लेकिन इस तरह के निर्णय तभी लिए जाते हैं जब यह पार्टी का निर्णय हो या फिर पार्टी और उम्मीदवार के बीच 'कुछ ठीक नहीं' वाली स्थिति उत्पन्न हो जाए.

15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की नम्बर वन रहने वाली पार्टी टीएमसी के एक सीट से हाथ खींच लेने का कारण पचाने वाला नहीं है. यह बीजेपी की एक सीट और बढ़ जाने या टीएमसी की एक और हार का मामला नहीं है. राजनीति में पार्टियों की हार-जीत लगी रहती है, यह विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर उभर चुके असंतोष का ही परिणाम है. जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बाद को कालीघाट में टीएमसी विधायकों की बैठक हुई थी. इस बाठक में फाल्ता उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव से हटने का मुद्दा तो उठा ही, लेकिन यह बैठक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को निशाने पर लिए जाने के कारण ज्यादा चर्चा में रही. बैठक में ममता बनर्जी भी मौजूद थी, लेकिन इस दौरान वह लगभग मूकदर्शक बनी रहीं. जब ऐसी परिस्थितियां पार्टी में उभरने लगी हैं तो उसके एक उम्मीदवार का चुनाव से हटने का फैसला लेना कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता.

वैसे यहां यह बता दें कि भले ही जहांगीर खान ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया है. लेकिन उनका यह फैसला चुनाव आयोग की नजर में आधिकारिक फैसला नहीं है. इसलिए 21 मई को जब फाल्ता में जब पुनर्मतदान होगा तब ईवीएम पर टीएमसी पार्टी का निशा और उम्मीदवार का नाम दोनों होंगे. यानी अगर उस पर कोई वोट डालना चाहे तो वह डाल भी सकता है. और वह वोट वैध भी माना जाएगा. जहांगीर खान का ऐलान सिर्फ इसलिए किया गया कि उसे वोट न दिया जाए.

पहले हुए मतदान और कल होने जा रहे मतदान में यह माना जा रहा था कि जहांगीर खान का चुनाव लड़ना बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता था, लेकिन अब बीजेपी का रास्ता आसान कर हो गया है. बता दें कि भाजपा ने यहां देबांशु पांडा चुनाव मैदान में  है. मगर इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरत वाली बात यह है कि चुनाव छोड़ने के बावजूद जहांगीर खान पर अब तक कोई पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की?  

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