दीदी के साथ कोई 'ममता' नहीं! टीएमसी विधायकों ने कर दिया बड़ा खेला? 80 में से 60 विधायक स्पीकरसे मिले, बनाएंगे 'असली TMC'

By Pramod Kumar,News11 Bharat,
दीदी के साथ कोई 'ममता' नहीं! टीएमसी विधायकों ने कर दिया बड़ा खेला? 80 में से 60 विधायक स्पीकरसे मिले, बनाएंगे 'असली TMC'

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क:  पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सर्वेसर्वा ममता बनर्जी के साथ उन्हीं के पार्टी विधायक बहुत बड़ा खेला करने जा रहे हैं. ममता बनर्जी के साथ जो खेला होने जा रहा है, उसी पार्टी का तख्ता पलट भी कह सकते हैं. जैसा महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ हुआ था, वैसा ही कुछ पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के साथ होने जा रहा है.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद राजनीति पलपल बदल रही है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंदर. टीएमसी के अंदर मची भगदड़ ने विकराल रूप ले लिया है. नये राजनीतिक घटनाक्रम में बुधवार को टीएमसी के 80 में से 60 विधायक कोलकाता में विधानसभा पहुंच गये. उन्होंने विधायक स्पीकर से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि ये 60 विधायक खुद को असली TMC घोषित करने के लिए विधानसभा पहुंचे हैं. इन बागी विधायकों का नेतृत्व पार्टी से निकाले गए संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं.  

यानी विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी दो टुकड़ों में बंटने जा रही है. अगर ऐसा होता है तब भले ही एक एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के हाथ में रहे, लेकिन उनके पास संवैधानिक रूप से असली टीएमसी का ठप्पा और निशान दोनों छिन जाएगा. जबकि दूसरे गुट की कमान संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी संभाल सकते हैं और इनके पास असली पार्टी का लेबल और निशान रह जाएगा.

इस घटना क्रम के बाद बागी टीएमसी नेताओं की ओर से बयान भी सामने आ गयहा है. बागी टीएमसी के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने स्पीकर से मिलने और ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन ऐसा करने के पीछे की वजह भी बताई है. उनका कहना है कि वह ममता बनर्जी के विरोधी नहीं है. उन्होंने पार्टी के बचाने के लिए यह कदम उठाया है. बागी नेता मुस्तफिजुर रहमान के इस दावे के बाद सारी सच्चाई भी उजागर हो जाती है कि हमारे पास 59 विधायकों का समथर्न है और हम ही असली टीएमसी हैं.

टीएमसी में जो ताजा फूट पड़ी है, उसकी असली वजह खुद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ही हैं. सभी यह मानते हैं कि ममता से अधिक अभिषेक का दखल पार्टी में बढ़ा है. अभिषेक अपने हिसाब से फैसले ले रहे हैं. चुनाव हारने के बाद भी उनकी सोच में किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया है. बागी नेताओं का कहना है कि अभिषेक के आसपास कुछ लोग हैं, वह केवल उन्हीं की ही सुनते है. जरूरत के वक्त उनसे मिलना भी बहुत मुश्किल हो गया है. इन स्थितियों से अवगत रहने के बाद भी ममता बनर्जी आंखें मूंदें बैठी हैं.

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