संतोष कुमार/न्यूज11 भारत
चांडिल/डेस्क: चांडिल बांध का जलस्तर लगातार बढ़ने और जल निकासी की वर्तमान स्थिति को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने विभाग एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की बैठकों में लिए गए निर्णयों और जमीनी स्तर पर की गई तैयारियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.
19 अगस्त 2026 को शाम 4:00 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार चांडिल बांध का जलस्तर 181.27 मीटर पहुंच गया है. बांध से कुल 1867.780 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है. इसके बावजूद जलस्तर में वृद्धि को लेकर स्थानीय लोगों और बांध प्रभावित परिवारों में चिंता बनी हुई है.
इस स्थिति पर राकेश रंजन महतो ने अधिकारियों से सीधे सवाल किया:
मंच के सवाल
- जब मौसम विभाग लगातार बारिश की चेतावनी और पूर्वानुमान दे रहा था, तो चांडिल बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए पहले से प्रभावी योजना क्यों नहीं बनाई गई?
- यदि विभाग की नीति जलस्तर को 180 आरएल के आसपास बनाए रखने की थी, तो यह सामान्य समझ की बात नहीं है कि लगातार बारिश होने पर जलस्तर 180 आरएल से ऊपर जाएगा?
- क्या जलस्तर बढ़ने और संकट की स्थिति उत्पन्न होने के बाद ही पानी छोड़ने की रणनीति बनाई जाएगी? क्या यही आपदा प्रबंधन की पूर्व योजना है?
- आपदा बैठक में जो निर्णय लिए गए थे, वे जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं? आखिर वे निर्णय लागू हुए या केवल बैठक की कार्यवाही तक सीमित रह गए?
- क्या बांध प्रबंधन के पास बारिश, जल बहाव और निचले क्षेत्रों की क्षमता का आकलन करने के लिए कोई वैज्ञानिक एवं पूर्व निर्धारित जल प्रबंधन योजना है?
- अब यह कहा जा रहा है कि अधिक पानी नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि निचले क्षेत्रों और जमशेदपुर में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. सवाल यह है कि क्या इस संभावित स्थिति का पूर्व अनुमान नहीं लगाया गया था?
- यदि भारी बारिश की संभावना पहले से थी, तो पानी की चरणबद्ध निकासी पहले क्यों नहीं की गई, ताकि बाद में अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़ने की मजबूरी न बने?
- चांडिल बांध के विस्थापितों और नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए विभाग की स्पष्ट और लिखित कार्ययोजना क्या है?
राकेश रंजन महतो ने कहा कि जल प्रबंधन केवल संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने का विषय नहीं है, बल्कि यह पूर्व योजना, मौसम पूर्वानुमान, जल आवक के अनुमान और निचले क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है.
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा- “प्यास लगने के बाद कुआं नहीं खोदा जाता. उसी तरह जलस्तर बढ़ने और बाढ़ का खतरा सामने आने के बाद योजना बनाने के बजाय, बारिश के मौसम से पहले ही ठोस और वैज्ञानिक योजना तैयार होनी चाहिए थी.”
महतो ने कहा कि विभाग को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि जलस्तर नियंत्रण के लिए उसकी पूर्व निर्धारित योजना क्या थी और वर्तमान परिस्थिति से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने मांग की कि चांडिल बांध के जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की स्थिति की नियमित, पारदर्शी और सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा चांडिल बांध के विस्थापितों एवं संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
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