Bihar Land Registry: बिहार के इन 11 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक, जानें सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

बिहार के 11 जिलों में अनियोजित विकास रोकने हेतु सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री और निर्माण पर 2027 तक रोक लगा दी है। अब मास्टर प्लान के तहत आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप बसाकर शहरों का व्यवस्थित विस्तार होगा।

By Anshuman Parashar
Bihar Land Registry: बिहार के इन 11 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक, जानें सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: बिहार के बड़े शहरों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सजाने और संवारने के लिए राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर समेत प्रदेश के 11 प्रमुख जिलों के खास इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, ट्रांसफर और किसी भी नए निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार का यह कड़ा फैसला उन क्षेत्रों के लिए लिया गया है जहां बिना किसी ठोस योजना के धड़ल्ले से कॉलोनियां काटी जा रही थीं। अब इन इलाकों को अत्याधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य के शहरों में जाम, जलजमाव और गंदगी जैसी समस्याएं न रहें।

मास्टर प्लान से बदलेगी शहरों की सूरत और बढ़ेगा रोजगार

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब बिहार के शहरों का विस्तार किसी बिल्डर की मर्जी से नहीं, बल्कि बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम, 2012 के तहत बने 'मास्टर प्लान' के हिसाब से होगा। इस पाबंदी के दौरान सरकार इन चिन्हित क्षेत्रों के लिए जोनल प्लान तैयार करेगी, जिसमें सड़क, सीवरेज, स्कूल और अस्पतालों के लिए जगह पहले से तय होगी। इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मुख्य शहरों पर आबादी का बोझ कम होगा और नए आर्थिक केंद्र विकसित होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

साल 2027 तक का समय तय, जानिए आपके जिले की क्या है स्थिति

विभाग ने इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी है। पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर के कोर इलाकों में यह पाबंदी 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी। वहीं, मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी के लिए सरकार ने 30 जून 2027 तक का समय तय किया है। इस अवधि के दौरान इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की रजिस्ट्री या निर्माण कार्य गैर-कानूनी माना जाएगा। सरकार के इस फैसले से जमीन के अवैध कारोबारियों में हड़कंप है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिहार के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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