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मंत्री बने रहेंगे दीपक प्रकाश, देवेश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा

दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने के लिए BJP MLC देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। <br/>

By Rani Thakur
मंत्री बने रहेंगे दीपक प्रकाश,  देवेश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 
अश्मित सिन्हा / पटना :  
दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने के लिए BJP MLC देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सभापति से मिलकर अपना त्यागपत्र सौंपा है। सरकार देवेश कुमार की जगह दीपक प्रकाश को MLC बनाकर एडजस्ट करेगी। देवेश कुमार 17 मार्च 2021 को राज्यपाल मनोनीत कोटे से MLC बने थे। अगले साल मार्च तक उनका कार्यकाल भी पूरा हो रहा है।

किसी सदन के सदस्य नहीं थे दीपक 

नियम के अनुसार मंत्री बने रहने के लिए शपथ लेने के 6 महीने के अंदर विधानमंडल या विधानपरिषद की सदस्यता लेना जरूरी होता है। दीपक प्रकाश अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से सवाल पूछा था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि मंत्री दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के, लेकिन वो मंत्री के पद पर हैं।

पूरा संवैधानिक पेंच

संविधान के मुताबिक, कोई भी गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे चुनाव जीतकर आना होता है। बिहार सरकार और एनडीए नेताओं का मानना है कि नई सरकार के गठन के बाद से दीपक प्रकाश का नया कार्यकाल शुरू हुआ है, इसलिए उनके पास अभी समय है।

15 अप्रैल को दीपक का मंत्री पद हुआ खत्म

15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ सरकार समाप्त हो गई। उनका मंत्री पद भी खत्म हो गया। इसके बाद करीब 22 दिनों तक वह मंत्री नहीं रहे। 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने पर दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जबकि तब भी वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। इसी को लेकर विवाद चल रहा है।

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) कहता है कि यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान पार्षद नहीं है, तब भी उसे मंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है। ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।

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