बिहार विधानसभा में विशेष अधिकार न्यायालय शुरू

बिहार विधानसभा में शुरू हुआ विशेष अधिकार न्यायालय, इन विशेष मामलों पर होगी सुनवाई

बिहार विधानसभा में विशेष अधिकार न्यायालय की शुरुआत की गई है। इस न्यायालय में विधायकों के अधिकार हनन से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी।

By Rani Thakur
बिहार विधानसभा में शुरू हुआ विशेष अधिकार न्यायालय, इन विशेष मामलों पर होगी सुनवाई

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न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार विधानसभा में जनप्रतिनिधियों और सदन की गरिमा की रक्षा के लिए एक नई व्यवस्था की शुरुआत की गई है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सोमवार को विशेष अधिकार न्यायालय कक्ष का उद्घाटन किया। 

जज होंगे विधानसभा के अध्यक्ष 

यह न्यायालय सदन के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों के विशेषाधिकारों के हनन से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगा। विधानसभा के अध्यक्ष ही विशेष अधिकार न्यायालय के जज होंगे और सारे मामलों की सुनवाई वे खुद ही करेंगे। विधानसभा की कार्यवाही और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को अधिक प्रभावी ढंग से संरक्षित करने के उद्देश्य से इस पहल की शुरुआत की गई है। 

क्या है विशेष अधिकार न्यायालय?

विशेष अधिकार न्यायालय विधानसभा के विशेषाधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाया गया एक विशेष मंच है। यदि किसी विधायक, विधान परिषद सदस्य, विधानसभा अधिकारी या कर्मचारी को लगता है कि उसके विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह इस न्यायालय में शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलने के बाद मामले की सुनवाई की जाएगी और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

कैसे होगी सुनवाई?

विशेष अधिकार न्यायालय में किसी भी शिकायत पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा। शिकायतकर्ता और आरोपित पक्ष दोनों की बातें सुनी जाएंगी। मामले से जुड़े तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद विधानसभा अध्यक्ष अंतिम निर्णय देंगे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना और सदन की गरिमा को बनाए रखना है।

मुख्य सचिव और डीजीपी को भी बुलाया जा सकेगा

इस न्यायालय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि आवश्यकता पड़ने पर राज्य के वरिष्ठतम अधिकारियों को भी तलब किया जा सकता है। किसी मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव, डीजीपी या अन्य उच्च अधिकारियों को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना पड़ सकता है। इससे विधानसभा के अधिकारों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

विधानसभा को मिलेगी नई संस्थागत ताकत

विशेष अधिकार न्यायालय की स्थापना को लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके जरिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ सदन की गरिमा और सर्वोच्चता को भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेगी तथा विशेषाधिकार हनन से जुड़े मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटारे में मददगार साबित होगी।

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