नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के समारोहों का समापन 20 अक्टूबर को नागपुर में आयोजित होने वाले वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम के साथ करने की तैयारी में है। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और इजरायल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच सहित कई प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया गया है।
नागपुर में होगा कार्यक्रम
कार्यक्रम नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित होगा, जिसका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास में विशेष महत्व है। दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपना वार्षिक विजयादशमी संबोधन देंगे। आयोजन में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।
डॉ. मोहन जी भागवत के संबोधन पर रहेगी नजर
RSS का विजयादशमी संबोधन संगठन के वार्षिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करने के साथ देश और समाज से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर अपने विचार रखते हैं। इस बार का संबोधन इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संघ ने वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए थे। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन में संगठन की भावी प्राथमिकताओं, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय विकास और समाज को मजबूत बनाने में नागरिकों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार सामने आने की संभावना है।
इजरायल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच भी होंगे शामिल
इजरायल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच को आमंत्रित किया जाना भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू है। भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग रहा है। ऐसे में इजरायली राजनयिक की संभावित मौजूदगी से आयोजन का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ेगा।रेवाच पहले भी नागपुर का दौरा कर चुके हैं और शैक्षणिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं।
1925 में हुई थी आरएसएस की स्थापना
आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। शुरुआत में सीमित स्तर पर शुरू हुआ संगठन समय के साथ देश के कई हिस्सों में विस्तारित हुआ। वर्तमान में संघ की शाखाओं और उससे जुड़े विभिन्न प्रयासों के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सेवा, ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में काम किया जाता है।
संघ ने वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर देशभर में शताब्दी वर्ष के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। पिछले वर्ष के विजयादशमी समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया था, जिसमें संगठन की सेवा गतिविधियों की सराहना की गई थी।
दूसरे शताब्दी वर्ष की दिशा पर होगा फोकस
शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर जोर दिया। अब 20 अक्टूबर को होने वाले विजयादशमी कार्यक्रम के साथ इन समारोहों के समापन की तैयारी है। कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी के बीच सभी की निगाहें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन पर रहेंगी। उनके विचारों से संघ की आगामी योजनाओं और दूसरे शताब्दी वर्ष में संगठन की प्राथमिकताओं को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है।