MP IAS Warrant: मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने अदालत के पुराने आदेश का अनुपालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने आईएएस अधिकारी विवेक पोरवाल और आईएएस संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों की 21 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेशी कराई जाए।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद सागर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सेक्शन ऑफिसर शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा हुआ है। शीला सेन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को 90 दिनों के अंदर नियमितीकरण पर फैसला लेने का स्पष्ट निर्देश दिया था। तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी जब प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो याचिकाकर्ता ने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी।
गैरहाजिरी और लापरवाही पर कोर्ट सख्त
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट के संज्ञान में आया कि सितंबर 2025 में ही दोनों आईएएस अफसरों को अवमानना नोटिस तामील कराए जा चुके थे। नोटिस मिलने के बावजूद न तो अधिकारियों की ओर से कोई वकील उपस्थित हुआ और न ही कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई।
भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर SP को मिली जिम्मेदारी
दिसंबर 2025 में सागर कलेक्टर की ओर से तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त करने का पत्र भेजा गया था, लेकिन कोर्ट ने पाया कि इसके बाद भी मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अदालत ने अधिकारियों के रवैये को अदालती आदेश की अवमानना माना और 10 सितंबर 2026 को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। आईएएस विवेक पोरवाल की कोर्ट में उपस्थिति कराने की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर को और आईएएस संदीप जीआर की उपस्थिति कराने की जिम्मेदारी सागर एसपी को सौंपी गई है।