नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने संगठन को जमीन पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष सोमवार से दो दिवसीय पंजाब दौरे पर हैं। इस दौरान वह पटियाला, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर में संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।
इन बैठकों में बूथ और मंडल स्तर की तैयारियों की समीक्षा के साथ चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। पार्टी का फोकस संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर है।
117 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी
बीजेपी और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाओं के बीच पार्टी नेता फिलहाल अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दे रहे हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि पार्टी सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। जून में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन भी पंजाब के दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने पार्टी नेताओं को सभी 117 सीटों पर चुनावी तैयारी करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, इसी महीने संसद के मानसून सत्र के दौरान अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। अकाली दल के नेताओं की ओर से भी बीजेपी के साथ दोबारा गठबंधन के समर्थन में बयान सामने आए हैं।
2022 के बाद बीजेपी ने बढ़ाया फोकस
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन सीमित रहा था। उस समय पार्टी अकाली दल से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरी थी। इसके बाद बीजेपी ने पंजाब में अपना सामाजिक और राजनीतिक आधार बढ़ाने के लिए संगठन पर जोर बढ़ाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ा था। पार्टी को राज्य में करीब 18.5 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कोशिश लगातार जारी है।
वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश
बीएल संतोष के दौरे को संगठन की समीक्षा के साथ-साथ पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को कम करने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। संगठनात्मक बदलाव के बाद पंजाब बीजेपी में कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी सामने आई है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व पुराने नेताओं, नए पदाधिकारियों और दूसरे दलों से बीजेपी में आने वाले नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दे रहा है। चुनाव से पहले संगठन में एकजुटता और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बीजेपी के लिए अहम मानी जा रही है।